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घपला : सीएससी से बने क्लेम के सहारे फर्जीवाड़ा करके लगाई चपत

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत रबी फसल (सीजन 2024) खराब होने पर बांटा गया करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम 85 फीसदी उन खातों में गया, जो फर्जी तरीके से जनसुविधा केंद्र (सीएससी) के जरिये खुले थे। यह सभी खाते गैर ऋणी किसानों के मिले हैं। इनके करीब 4000 खातों में बीमा क्लेम की 85 फीसदी रकम भेजी गई जबकि चार लाख से अधिक बीमा क्लेम के हिस्से महज 15 फीसदी रकम ही आई।
इस तरह सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई। हैरानी की बात यह कि यह पैसा क्राप कटिंग के साथ व्यक्तिगत सर्वे के आधार पर दिया गया। इस वजह से बीमा कंपनी एवं राजस्व कर्मी भी सवाल के घेरे में हैं।
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फसल खराब होने पर सरकार की ओर से बांटे जाने वाले करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पने के लिए बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ। अमर उजाला ने इस घोटाले का भंडाफोड़ किया। छानबीन के दौरान इस घोटाले की नई परतें रोज सामने आ रही हैं। अब नया तथ्य यह सामने आया कि जालसाजों ने गैर ऋणी किसान श्रेणी के अंतर्गत रेलवे की जमीन, बंजर, नदी, तालाब, पहाड़ समेत अन्य सरकारी जमीन की फर्जी आराजी लगाकर सभी क्लेम जनसुविधा केंद्र (सीएससी) से भरे थे।
इन्हीं गैर ऋणी किसानों के खाते में बीमा क्लेम की रकम आई। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मऊरानीपुर ब्लॉक के घाट लहचूरा में केसीसी किसानों ने कुल 972 बीमा क्लेम किए जबकि 93 क्लेम गैर ऋणी किसानों के हुए। यहां चुनिंदा केसीसी किसानों को छोड़ फर्जी खाते में कुल 18 लाख रुपये क्लेम दिया गया। खरकामाफ गांव में केसीसी किसानों ने 1202 क्लेम दाखिल किया जबकि गैर ऋणी किसानों का यहां कोई क्लेम नहीं था। इस वजह से यहां किसी को मुआवजा दिया ही नहीं गया।
बड़ागांव ब्लॉक के कलोथरा गांव में केसीसी की 76 बीमा पालिसी हुई जबकि 24 गैर ऋणी किसानों ने पॉलिसी क्लेम की। यहां भी सिर्फ गैर ऋणी किसानों को ही पैसा पहुंचा। डगरवाह, गगौनी, पडारी, बाजना, नयागांव एवं गतारा गांव में गैर ऋणी किसानों के नाम पर बनाए गए फर्जी खातों में बीमा की रकम गई। आकलन के मुताबिक, रबी सीजन में बांटे गए फसल बीमा की करीब 85 फीसदी रकम इन्हीं फर्जी खातों में भेजी गई। उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह का कहना है कि जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही बात सामने आ सकेगी।
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इनसेट
फसल नुकसान का इस तरह से हुआ आकलन
पीएम फसल बीमा योजना में मुआवजा बांटने की प्रक्रिया तय है। इसके तहत यदि किसी गांव में सभी किसानों की फसल प्राकृतिक आपदा से खराब हो जाने की सूचना मिलती है, तब उस गांव के कुछ खेतों की फसल की क्राॅप कटिंग कराई जाती है और इससे नुकसान का आकलन करते हुए फसल बीमा कराने वाले सभी किसानों को क्लेम दिया जाता है। इसे क्राॅप कटिंग के आधार पर क्लेम भुगतान कहा जाता है। इस तरह से क्लेम भुगतान प्रक्रिया में बीमा कंपनी के साथ राजस्व विभाग की टीम शामिल रहती है। इसके विपरीत यदि किसी गांव में एक दो किसानों की किसी वजह से फसल खराब हो गई तो बीमा कंपनी के एजेंट मौके पर जाकर सर्वे करते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी संबंधित किसान को क्लेम देती है। इसे व्यक्तिगत दावा कहा जाता है। बीमा क्लेम में हुए फर्जीवाड़े में सबसे अधिक व्यक्तिगत दावों के जरिये भुगतान किया गया।
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