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झांसी में खेतोें की प्यास बुझाने के नाम पर अफसर डकार गए 55 करोड़

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झांसी। प्यासे बुंदेलखंड में खेतों तक पानी पहुंचाने की खातिर सरकार दिल खोलकर पैसे खर्च कर रही है लेकिन, निगरानी न होने से इस रकम का एक बड़ा हिस्सा अफसरों की जेब तक पहुंच जाता है। अगर सिर्फ 2019 की बात करें तो करीब 55 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाएं घोटाले की भेंट चढ़ चुकीं। आरोप सही पाए जाने पर जहां एक एक्सईएन को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया वहीं, एक अधीक्षण अभियंता, तीन अधिशासी अभियंता, नौ अवर अभियंता एवं छह जूनियर अभियंता निलंबित किए जा चुके।
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केस एक:
टेंडर पूल करके अपनों में बांट दिए 30 करोड़ के काम
गड़बड़ी की पुष्टि के बाद एक्सईएन समेत दो अवर अभियंता निलंबित
बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत लघु सिंचाई विभाग को तीस करोड़ रुपये चेकडैम एवं तालाब के कार्य कराने के लिए वर्ष 2019 में दिए थे। इसकेजरिए 40 चेकडैम एवं 44 तालाबों का गहरीकरण होना था। गांव एवं स्थान चयनित कर लिए गए। डीएम की ओर से कराई गई जांच में मालूम चला कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता मोहन प्रकाश पासवान, अवर अभियंता राजीव कुमार चौधरी एवं रवींद्र कुमार एवं लेखा लिपिक प्रदीप कुमार अस्थाना ने मिलीभगत से यह सारा काम अपने चहेते ठेकेदारों में बांट दिया। आरोपों की पुष्टि के बाद अधिशासी अभियंता, दो अवर अभियंता निलंबित कर दिए गए जबकि तीन दर्जन से अधिक कार्यदायी एजेंसियां ब्लैक लिस्ट हो गईं। यह पैसा भी शासन को वापस करना पड़ा। यह रकम आज तक नहीं मिली है।
केस दो:
खोदाई में निकले पत्थरों की नहीं कराई नीलामी, पचा गए साढ़े सोलह करोड़
एक एसई, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई पर आरोप तय
गरौठा में करीब 610 करोड़ की लागत से प्रस्तावित एरच बांध परियोजना घपले में उलझकर दम तोड़ती जा रही है। इस परियोजना पर सरकार 401 करोड़ की मोटी रकम खर्च कर चुकी। आरोप हैं कि वर्ष 2018-19 में बांध निर्माण के दौरान नीचे से निकले पत्थरों को बिना टेंडर कराए बेच दिया गया। जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई। जिस खनिज की कीमत उस समय करीब सवा दो सौ रुपये थी उसे आधी से कम कीमत पर चहेतों ठेकेदारों को दे दिया गया। जांच एजेंसी ने करीब साढ़े सोलह करोड़ रुपये के घपले की पुष्टि की। इसमें एक अधीक्षण अभियंता, दो एक्सईएन, सात एई एवं छह जेई को अनियमितता में शामिल पाया गया।
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केस तीन
बिना सिल्ट साफ कराए ठेकेदारों को दे दिया 77.35 लाख
बर्खास्त हो गए एक्सईएन जबकि कैशियर एवं खंड लेखाधिकारी निलंबित
बेतवा प्रखंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने वर्ष 2019 में सिल्ट सफाई एवं मरम्मत कार्य कराए बिना छह ठेकेदारों को एडवांस के तौर पर 77.35 लाख का भुगतान कर दिया। जांच में मामला सही मिलने पर अधिशासी अभियंता को शासन ने बर्खास्त कर दिया जबकि कैशियर, सहायक लेखाधिकारी निलंबित हैं। इसी तरह सपरार प्रखंड में वर्ष 2020 में बिना टेंडर कराए करीब 30 लाख रुपये का काम ठेकेदारों के बीच बांट दिए गए थे। वर्ष 2019 से 2021 के बीच अन्य डिवीजनों में खरीद में करीब सात करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है। इनकी जांच अभी चल रही है।
केस चार
तालाब बंधी बनाने पर 90 लाख का घपला
बुंदेलखंड में कम बारिश की वजह से सरकार ने खेतों में तालाब के जरिए बंधी बनाकर सिंचाई योजना में भी घोटाला हुआ। तत्कालीन उपनिदेशक भूमि संरक्षण अजीत सचान ने वर्ष 2020 में करीब 90 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी। जांच रिपोर्ट में उन्होंने तत्कालीन बीएसए, भूमि संरक्षण अधिकारी समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी। इस मामले की जांच अभी भी शासन स्तर पर लंबित है।
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जहां भी गड़बड़ी प्रकाश में आती है, उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है। आगे भी निगरानी की व्यवस्था को मजबूत बनाया जा रहा है।
महेश्वरी प्रसाद, मुख्य अभियंता (परियोजना)
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