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कैंसर से बेटे को मरते देखा, औरों की जान बचाने को दान की पांच लाख की दवाइयां

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झांसी रेलवे की नौकरी से रिटायर्ड हुआ तो सोचा था कि जवान बेटों के साथ बुढ़ापा सुख-चैन से कटेगा। क्या पता था कि जिस बेटे के कंधे को मैं अपने बुढ़ापे का सहारा समझ रहा था, एक दिन मेरी आंखों की सामने उसकी अर्थी उठेगी। वह कैंसर से तिल-तिलकर दम तोड़ देगा और मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा...। आज भी मैं किसी कैंसर पीड़ित को देखता हूं तो मेरे बेटे का वो असहनीय दर्द भरा चेहरा मेरे सामने आ जाता है। बुढ़ापे में जवान बेटे को खोने का यह दर्द झांसी के रामबाबू बरी को दिन-रात कचोटता है। लेकिन रामबाबू की हिम्मत चट्टान की तरह मजबूत है। इस पीड़ा में भी इन्होंने कैंसर पीड़ित लोगों के इलाज के लिए करीब पांच लाख के कई महंगे इंजेक्शन व दवाइयां दान की हैं।
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झांसी में रानी लक्ष्मीबाई नगर मालगोदाम, सीपरी के पास रहने वाले रामबाबू बरी 12 साल पहले रेलवे के सीनियर डीसीएम कॉमर्शियल विभाग से रिटायर हुए थे। परिवार में बड़ा बेटा दीपचंद बरी रेलवे में ही पार्सल विभाग में कार्यरत था। इसके अलावा छोटा बेटा अनिल कुमार (35) भी रेलवे में कार्यरत है। परिवार में पत्नी कमला देवी और एक शादीशुदा बेटी आशा देवी हैं। बेटी की ससुराल झांसी में ही है। तकरीबन 71 साल के रामबाबू बताते हैं कि जब वह रिटायर हुए थे तो बहुत खुश थे। लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना के दौरान उनकी खुशियों को ग्रहण लग गया। एक दिन अचानक बड़े बेटे दीपचंद (45) की हालत बिगड़ गई। तमाम जांचों के बाद डॉक्टर ने बताया कि बेटे को गले में कैंसर हो गया है। हम शहर-शहर दौड़े, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। टाटा कैंसर हॉस्पिटल मुंबई और दिल्ली भागे। लाखों का खर्च आया। बेटे की जिंदगी के आखिरी दिनों में दिल्ली में डॉक्टरों ने कई महंगे-महंगे इंजेक्शन व दवाइयां मंगाईं। ताकि बेटे की जान बचाई जा सके। लेकिन नवंबर 2021 में आखिरकार बेटे ने दम तोड़ दिया। लाखों की दवाइयां-इंजेक्शन यूं ही धरे गए...। मेरी आंखों के सामने बेटे की अर्थी उठ गई।
रामबाबू ने बताया कि बेटे लिए मंगाए गए करीब पांच लाख के महंगे इंजेक्शन उनके पास अभी भी सुरक्षित हैं। यह इंजेक्शन किसी कैंसर पीड़ित की जान बचा सकते हैं। रामबाबू बरी ने बताया कि बड़े बेटे दीपचंद का इकलौता बेटा विशाल तैराकी में स्टेट चैंपियन है।
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‘दवा से दुआ’ अभियान के बारे में पढ़ा तो इंजेक्शन दान करने की इच्छा हुई...
झांसी। रामबाबू बताते हैं कि अमर उजाला अखबार में उन्होंने हाल ही में शुरू हुए ‘दवा से दुआ’ अभियान के बारे में पढ़ा तो बेटे को कैंसर से बचाने के लिए खरीदे गए करीब पांच लाख के इंजेक्शन व दवाई दान करने की इच्छा मन में हुई। ये इंजेक्शन किसी कैंसर पीड़ित जरूरतमंद की जान बचाने में काम आ सकते हैं। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आए रामबाबू ने परिवार के साथ इंजेक्शन दान किए। रामबाबू एक अच्छे तैराक हैं, कुछ समय पहले वह झांसी स्टेडियम में बच्चों को तैराकी सिखाते थे।
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