सुल्ताना वह डाकू था, जिसने नजीराबाद के नवाब नजीबुद्दौला के किला पर कब्जा कर लिया था। अंग्रेजी हुकूमत की फौज उसे तलाशने के लिए छापेमारी करती, मगर वह हाथ नहीं आता था। कभी वह कब्जाए गए किला में छुप जाता तो कभी किसी गांव में। उसके ऊपर पिक्चर भी बन चुकी है। वर्तमान में जिला पुलिस के लिए सरदार सिंह गुर्जर को यदि सुल्ताना डाकू कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसकी वजह सैकड़ों बार दबिश देने के बावजूद उसके बारे में कोई सुराग नहीं लग पाना है।
पुलिस दावा करती है कि सरदार के छह शरणदाताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिर भी हैरानी है कि आज तक उसके ठिकाने के बारे में पुलिस को पता नहीं है। पुलिस सूत्रों पर यकीन करें तो सरदार के गिने चुने ही फोटो पुलिस के पास हैं। गुरुवार को सरदार सिंह गुर्जर की गिरफ्तारी के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने सूबे के आला पुलिस अधिकारियों को कोई सुराग नहीं लगने पर फटकार लगाई। तमाम कार्रवाइयां करने के साक्ष्य देने के बाद कोर्ट ने 13 जुलाई तक का समय पुलिस अधिकारियों को दिया है।
बताते चलें सरदार सिंह कानपुर से पेशी पर लाते समय पुलिस को चमका देकर भाग गया था। तमाम प्रयास के बावजूूद जब मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश की पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी तो उस पर दोनों प्रदेश से 75 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि सरदार सिंह गुर्जर पर आला पुलिस अधिकारियों ने पुरस्कार की राशि बढ़ाने का फैसला कर लिया है, जिसकी जल्द ही संस्तुति की संभावना है।