समाजवादी पार्टी के जिला, महानगर के अध्यक्षों को छोड़कर अन्य पदाधिकारी बदले जाएंगे। 15 प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी भी बदलेगी। प्रदेश नेतृत्व ने जिले से योग्य कार्यकर्ताओं के नामों की सिफारिश भेजने को कहा है। प्रदेश कार्यालय से स्वीकृत होने के बाद 15 मार्च तक कमेटियों का पुनर्गठन होगा।
लोकसभा चुनाव के पहले सपा नए सिरे से कमेटी तैयार करेगी। जिला स्तर से 28 फरवरी तक प्रदेश कार्यालय को सिफारिश भेजनी होगी, जो शर्तें लगाई गई हैं, उससे कमेटी में शामिल कई लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कमेटी में वे लोग ही शामिल होंगे, जिन्होंने बूथ पर विधानसभा चुनाव में पार्टी को जितवाया हो। चूंकि, इस बार समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसलिए सदर सीट कांग्रेस को मिली थी। ऐसे में बूथ के पुराने रिकॉर्ड का संज्ञान लिया जाएगा। पदाधिकारियों के चयन में यह भी देखा जाएगा कि किसी के ऊपर आपराधिक मुकदमा दर्ज न हो। इसके अलावा कार्यकर्ता पार्टी के कार्यक्रमों में बराबर शामिल होता रहा हो। 2018 में मतदाता पुनरीक्षण अभियान में मतदाताओं को शामिल कराया हो।
वहीं, समाजवादी युवजन सभा, छात्रसभा, लोहिया वाहिनी, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड, महिला सभा, अल्पसंख्यक सभा, भूतपूर्व सैनिक सभा, व्यापार सभा, अधिवक्ता सभा, चिकित्सा, सांस्कृतिक समेत सभी 15 प्रकोष्ठ के पदाधिकारी नए सिरे से चयनित किए जाएंगे। इनके पदाधिकारी चयन में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष, प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जिला व महानगर अध्यक्ष की भूमिका होगी। वहीं, विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्षों को विधायक, पूर्व विधायक, प्रत्याशी या पूर्व प्रत्याशी की सहमति से तय किया जाएगा।
10 दिन में भेज देंगे सिफारिश
जिला व महानगर अध्यक्षों को छोड़कर कार्यकारिणी, प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के पुनर्गठन के लिए नामों की सिफारिश मांगी गई है। दस दिनों में पार्टी नेतृत्व को सूची भेज देंगे। मार्च में पुनर्गठन संभव है।
- मिर्जा करामत बेग, महानगर अध्यक्ष सपा।