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विकास न होने से ‘रो’ रहा सांसद का गोद लिया गांव

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झांसी/बबीना। सांसद आर्दश गांव में चयनित होने के बावजूद बबीना ब्लॉक के सरवां गांव के विकास की रफ्तार थमी हुई है। पीने के पानी, शिक्षा, सड़क, सिंचाई जैसी सुविधाओं के लिए लोग तरस गए हैं। सांसद द्वारा गोद लिए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि गांव का कायाकल्प होगा। इसके बावजूद भी वे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपना दुखड़ा रो रहे हैं। इसमें बजट सबसे बड़ा रोड़ा बनकर सामने आ रहा है। इसे न सांसद दूर कर पा रहे हैं और न इस कमी को प्रशासनिक अमला दूर कर पा रहा है। आर्दश सांसद ग्राम चयनित होने के बाद यहां कई कार्य प्रस्तावित हुए लेकिन, बजट न होने से तकरीबन अस्सी फीसद काम फाइलों से आगे नहीं बढ़ सके हैं।
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सांसद आदर्श ग्राम योजना के जरिए प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र से एक गांव चुनकर वहां सड़क, बिजली, पानी, पेंशन, आवास, रोजगार आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त करानी होती हैं। इसके लिए सांसद निधि के साथ सरकारी महकमे को मिलने वाले बजट से भी पैसे खर्च किए जाते हैं लेकिन, इसके बावजूद आदर्श सांसद गांव सरवां की तस्वीर नहीं बदली। झांसी-ललितपुर सांसद ने पिछले वित्तीय वर्ष में इसे चुना था। गांव में पानी, बिजली, सिंचाई, सड़क की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। आदर्श ग्राम में चुने जाने पर ग्रामीणों में आस जगी लेकिन, काम शुरू न होने से अब वह भी मायूस हैं। सिंचाई के लिए यहां लघु सिंचाई विभाग को दो चेकडैम बनाने थे लेकिन, पैसा न मिलने से अफसरों ने काम ही नहीं शुरू किया। उद्यान विभाग को
औषधीय खेती का क्लस्टर विकसित करना था लेकिन, यहां भी बजट आड़े आ गया। पेयजल की समस्या से निपटने के लिए 10 हजार लीटर की टंकी लगनी थी लेकिन, अभी बजट जारी होने का ही इंतजार हो रहा है। ट्रांसफार्मर एवं डीपी बदले जाने थे, वह काम भी पूरा नहीं हुआ।
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पर्याप्त शौचालय भी नहीं
स्वच्छ भारत मिशन के तहत यहां सिर्फ 500 शौचालय बनाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की आबादी करीब पांच हजार है। ऐसे में न्यूनतम 1000 शौचालय गांव में होने चाहिए। पंचायती राज विभाग से जरूरतमंदों के लिए शौचालय की मांग की गई। अफसर इसके लिए भी बजट का रोना रोते हैं।
संपर्क मार्गों की दशा दयनीय
गांव के संपर्क मार्गों की दशा भी बहुत अच्छी नहीं है। इन दिनों बारिश होने की वजह से गांव के भीतर भी जलभराव की समस्या आम है। आर्दश सांसद गांव की उपलब्धि के तौर पर कुछ दिनों पहले दूसरे गांवों में बने वेलनेस सेंटर की तरह यहां भी एक सेंटर बनवाया गया है।
पेंशन के लिए भी पात्र कर रहे इंतजार
गांव में रहने वाले वृद्घा पेंशन, विधवा पेंशन के नए आवेदकों को अब तक पेंशन स्वीकृत नहीं की जा सकी जबकि इसकी शिकायत ग्रामीणों ने खुद सांसद से की थी। कोविड के चलते इनके आवेदन
अभी तक सत्यापित नहीं किए जा सके जबकि यहां पर 37 वृद्घावस्था पेंशन, 84 निराश्रित और 25 को दिव्यांग पेंशन दी जा रही है।
दूसरा गांव चयनित करने में भी लेटलतीफी
सांसद आर्दश ग्राम हर वित्तीय वर्ष में चयनित किया जाना होता है। नए वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही भी इस माह खत्म हो जाएगी। अभी तक सिर्फ एक गांव ही सांसद की ओर से चुना जा सका जबकि दूसरे गांव की अभी कोई चर्चा तक शुरू नहीं हुई है।
विभागों के पास बजट न होने से कई काम पिछड़ गए हैं। बजट आने पर ही यह कार्य आरंभ कराए जा सकेंगे। - उग्रसेन यादव, जिला विकास अधिकारी
गांव में पानी की समस्या है। पीने के लिए भी पानी मुश्किल से मिलता है। पानी की टंकी अभी तक नहीं बन सकी है। - रमेश
सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। बिजली या फिर डीजल से नलकूप चलाना पड़ता है, जो बहुत महंगा पड़ता है। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर से तार लानी पड़ती है। - मोहन
फसलों के लिए बीज एवं खाद दिए जाने की बात कही गई लेकिन, तमाम किसानों को वह नहीं मिला। - सालिगराम
गांव के भीतर आने-जाने का रास्ता भी अच्छा नहीं हुआ। बरसात के समय गढ्ढों में पानी भर जाता है। इससे आने-जाने में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। - शिवेंद्र प्रजापति
विद्यालय का भी हाल बुरा
सांसद आर्दश ग्राम में एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है लेकिन, वह भी काफी जर्जर हो चुका। काफी अरसे से मरम्मत न होने से बरसात में छत टपकने लगती है। कई जगह से प्लास्टर के भी गिरने का खतरा बना हुआ है। यहां करीब 136 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं लेकिन, इनके पानी पीने के लिए यहां इंतजाम नहीं है। सांसद ने पानी की टंकी लगवाने का वादा किया था लेकिन, वह अभी तक नहीं लग सकी है।
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