समय पर पहुंचे अस्पताल तो ब्लैक फंगस से बच गई आंख
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस का शिकार एक मरीज का ऑपरेशन किया गया। शुरूआत में डॉक्टरों को लग रहा था कि मरीज की आंख निकालनी पड़ेगी। मगर वहां तक नहीं पहुंचा और मरीज की आंख बच गई। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के पांच नए मरीज भर्ती हुए हैं।
कोरोना महामारी के बीच अब ब्लैक फंगस का कहर मरीजों पर टूटने लगा है। लगातार सरकारी और निजी अस्पतालों में इस बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। रविवार रात से लेकर सोमवार तक ब्लैक फंगस के पांच नए मरीज मिले हैं। मेडिकल कॉलेज में इनका उपचार शुरू कर दिया गया है। वहीं, सोमवार को सीपरी बाजार निवासी 60 साल के बालकिशन का मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन किया गया। क्रिटिकल केयर इंचार्ज डॉ. रामबाबू ने बताया कि शुरूआत में लग रहा था कि मरीज की आंख तक फंगस पहुंच चुकी है, इसलिए उसे निकालना पड़ सकता है। ऐसे में नेत्र रोग विभाग के सर्जन भी ऑपरेशन में शामिल रहे। ऑपरेशन करने पर पता चला कि फंगस से आंख बची हुई है। उन्होंने कहा कि समय पर मरीज के भर्ती हो जाने के चलते आंख निकाले जाने से बच सकी। डॉ. रामबाबू ने ब्लैक फंगस के लक्षण सामने आने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की अपील की है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वैसे-वैसे फंगस नाक से होते हुए आंख, गाल और फिर दिमाग तक फैलती जाती है।
एक मरीज की निकाली जा चुकी है आंख
मेडिकल कॉलेज में चार दिन पहले ब्लैक फंगस का शिकार एक मरीज की डॉक्टरों को आंख तक निकालनी पड़ी थी। तब जाकर मरीज की जान बच सकी। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई।