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छोटे स्टेशनों के मुसाफिरों का सहारा थी साबरमती एक्सप्रेस, ठहराव बंद होने से परेशानी

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झांसी। उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने साबरमती एक्सप्रेस का एक फरवरी से झांसी रेल मंडल के नौ स्टेशनों पर ठहराव खत्म कर दिया। कोरोना काल में पैसेंजर ट्रेनों का संचालन न होने के कारण संबंधित स्टेशन के मुसाफिरों के लिए साबरमती एक्सप्रेस ही सहारा थी। यह सहारा भी उनसे छिन गया है।
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रेल मंडल में झांसी, ग्वालियर, मुरैना, दतिया, डबरा, बबीना, ललितपुर, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, महोबा, मऊरानीपुर, उरई, भीमसेन प्रमुख स्टेशन हैं। वैसे मंडल में छोटे- बड़े 163 स्टेशन हैं। मंडल से प्रतिदिन 140 अप और डाउन ट्रेनें गुजरतीं हैं। नियमित ट्रेनों के संचालन के वक्त उक्त सभी स्टेशनों से प्रतिदिन एक लाख से अधिक मुसाफिर सफर करते थे, जिनसे करीब 30 करोड़ की आमदनी हर महीने रेलवे को होती थी। कोरोना महामारी के चलते रेलवे ने 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया।
वर्तमान में अभी 60 से 70 फीसदी ही गाड़ियां चल रहीं हैं। चूंकि, ट्रेनों में सिर्फ कंफर्म टिकट के ही यात्री सफर कर रहे हैं। प्रतिदिन मुुश्किल से साढ़े तीन हजार से चार हजार यात्री ही सफर कर रहे हैं। जिनसे महीने में पांच से छह करोड़ रुपये ही आरक्षित टिकटों से मिल पा रहे हैं। मंडल को पिछले नौ महीने में चार अरब से अधिक का टिकटों से घाटा हो चुका है। इसमें कई स्टेशनों से रेलवे को कमाई नहीं हो रही है। रेलवे अब ऐसे स्टेशनों का ठहराव खत्म करने की तैयारी कर रहा है, जहां दस से कम यात्री सफर करने के लिए चढ़ रहे हैं।
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इस नीति के तहत अभी तक शताब्दी एक्सप्रेस का धौलपुर व झांसी- लखनऊ इंटरसिटी का चिरगांव से ठहराव खत्म किया जा चुका है। इसी तरह एक फरवरी से साबरमती एक्सप्रेस का मंडल के भीमसेन, लालपुर, पुखरायां, एट, मोंठ, चिरगांव, बबीना, धौर्रा व जाखलौन स्टेशन पर अग्रिम आदेश तक ठहराव खत्म कर दिया गया। उक्त स्टेशनों में अधिकांश पर अभी साबरमती एक्सप्रेस ही रुक रही थी। इस ट्रेन का सहारा भी छीनने से संबंधित क्षेत्र के लोगों की दिक्कतें बढ़ र्गइं हैं।
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- यात्रियों का ट्रैफिक न मिलने के कारण ही ऐसा निर्णय लेना पड़ता है। अभी जिन ट्रेनों के ठहराव खत्म किए, उससे संबंधित ट्रेनों का संचालन बेहतर हुआ है।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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