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Jhansi News: चार माह में एक पैसे का ऋण नहीं बांट पाया ग्रामीण विकास बैंक

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। किसानों की वित्तीय मदद कराने के इरादे से शुरू हुए भूमि ग्रामीण विकास बैंक की हालत कारोबार न होने से पतली होती जा रही है। हालत यह है कि ऊंची ब्याज दर के चलते किसान इनसे ऋण लेने ही नहीं आ रहे। इस वजह से इनका कारोबार ठप होता जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में भूमि विकास बैंक को 1.30 करोड़ रुपये ऋण वितरित करना था, लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी बैंक किसी को ऋण नहीं दे सका। ऋण नहीं बांट पाने के चलते इनका लक्ष्य भी लगातार घटता जा रहा है।

भूमि ग्रामीण विकास बैंक किसानों को दीर्घ अवधि के लिए ऋण मुहैया कराता है। इसके एवज में किसानों को अपनी भूमि बंधक रखनी पड़ती है। दो दशक पहले तक किसान इसी बैंक से ऋण लेकर ट्रैक्टर समेत अन्य महंगे कृषि उपकरण खरीदते थे। इस समय 1100 बकायेदार बैंक का करीब 22 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के चलन में आने के बाद से कारोबार को झटका लगा है। केसीसी के जरिये अल्पकालिक ऋण पर सिर्फ सात फीसदी ब्याज ही लगता है, जबकि समय पर भुगतान पर सिर्फ चार फीसदी ब्याज ही चुकाना पड़ता है। भूमि ग्रामीण विकास बैंक से अभी ऋण 11-13 फीसदी सालाना देना होता है। ऋण लेने के लिए बैंक का सदस्य होना भी आवश्यक है। इन सब परेशानी के चलते किसानों ने इस बैंक से दूरी बना ली है। वरिष्ठ प्रबंधक विनोद बाबू का कहना है कि ब्याज दर अधिक होने से किसान ऋण लेने में कम दिलचस्पी लेते हैं। हालांकि, इसके लिए कैंप लगाए जाते हैं।
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साल दर साल घट रहा लक्ष्य



ऋण न बांटे जाने की वजह से बैंक का लक्ष्य भी साल दर साल कम होता जा रहा है। वर्ष 2023 में जहां 2.10 करोड़ रुपये ऋण बांटने का लक्ष्य तय किया गया था, वहीं ऋण वितरित न हो पाने से 2024 में लक्ष्य घटाकर 1.41 करोड़ रुपये कर दिया गया। किसी तरह बमुश्किल 19.25 लाख का ऋण सात किसानों को दिया गया। इस तरह इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य घटाकर 1.30 करोड़ रुपये कर दिया गया। अभी तक किसी ने भी ऋण के लिए आवेदन नहीं किया है।
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