झांसी-ललितपुर पर प्लास्टिक कचरे से बनी सड़क।
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प्लास्टिक के कचरे का सही उपयोग करने के लिए एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) झांसी ने बृहस्पतिवार को झांसी-ललितपुर खंड में वेस्ट प्लास्टिक से सड़क बनाने का पायलट परियोजना के तहत ट्रायल किया। इसमें करीब 1,350 किलो वेस्ट एलडीपीई को नियंत्रित प्रक्रिया के तहत बिटुमिन में मिलाकर तैयार संशोधित मिश्रण से करीब एक किलोमीटर लंमे दो लेन के सड़क हिस्से पर बिटुमेन कंक्रीट बिछाई गई। यह ट्रायल एमओआरटीएच के मुख्य अभियंता एवं डायरेक्टर न्यू टेक्नोलॉजी बिधुर कांत झा और एनएचएआई पीआईयू झांसी के परियोजना निदेशक मनोज कुमार की देखरेख में कराया गया। कार्य एम/एस गायत्री प्रोजेक्ट्स ने किया।
ट्रायल में इस्तेमाल किया गया प्लास्टिक सामान्य नगर कचरे से नहीं लिया गया। इसमें मुख्य रूप से खराब हो चुके सिंचाई पाइप और वेस्ट फाइल-फोल्डर से प्राप्त एलडीपीई का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय रिसाइक्लर्स और एमएसएमई की मदद से प्लास्टिक को प्रोसेस कर एक समान पेलेटाइज्ड रूप में तैयार किया गया। इसके बाद मशीनों के जरिये निर्धारित मात्रा में इसकी डोजिंग कर बिटुमेन में नियंत्रित तरीके से मिलाया गया।
ऐसे बढ़ेगी सड़क की मजबूती
तकनीकी परीक्षणों में एलडीपीई मिश्रित बिटुमेन में नमी से होने वाले नुकसान के प्रति बेहतर प्रतिरोध और अधिक तापमान में सड़क पर पड़ने वाले रटिंग (गड्ढेनुमा निशान) के प्रति अधिक प्रतिरोध देखा गया है। इससे सड़क की कठोरता और उच्च तापमान में प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना जताई गई है।
आईआईटी बीएचयू के शोध से विकसित तकनीक
यह तकनीक आईआईटी बीएचयू, वाराणसी के प्रोफेसर अंकित गुप्ता के पर्यवेक्षण में एमओआरटीएच द्वारा प्रायोजित शोध परियोजना के तहत विकसित की गई है। तकनीक को ‘ए बिटुमिनस प्रोडक्ट फॉर पेवमेंट कंस्ट्रक्शन एंड ए मेथड ऑफ प्रिपरेशन देयरऑफ’ शीर्षक से पेटेंट से भी जोड़ा गया है।
अब ट्रैफिक के बीच होगी असली परीक्षा
ट्रायल के बाद सड़क के इस हिस्से की वास्तविक यातायात और पर्यावरणीय परिस्थितियों में निगरानी की जाएगी। इसके जरिये लंबे समय में सड़क के व्यवहार, टिकाऊपन और प्रदर्शन का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रायल में नगर ठोस कचरे से मिलने वाले अत्यधिक दूषित अथवा अलग-अलग गुणवत्ता वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
कचरे से सड़क तक का प्रयोग
एनएचएआई की यह पहल वेस्ट-टू-वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में प्रयोग के तौर पर देखी जा रही है। इसमें प्लास्टिक कचरे को निस्तारण की समस्या के बजाय सड़क निर्माण में उपयोगी इंजीनियरिंग संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना परखी जा रही है।