झांसी। झांसी के गौरवशाली इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख 19 मई 1842 है। यही वो दिन है जब बिठूर की मनु का झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ विवाह हुआ था और मनु को नया नाम लक्ष्मीबाई मिला था। कालांतर में यही नाम पूरी दुनिया में नारी शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा। झांसी में हर साल 19 मई को धूमधाम से रानी की शादी की सालगिरह का आयोजन किया जाता है, परंतु इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से सादगी के साथ लोगों ने रानी की शादी की सालगिरह मनाई। रानी के विवाह स्थल प्राचीन गणेश मंदिर के अलावा तमाम लोगों ने अपने घरों में दीप जलाकर व पुष्प वर्षा कर अपनी महारानी को याद किया। अमर उजाला की पहल पर लोगों ने अपने घरों में महारानी लक्ष्मीबाई की शादी की वर्षगांठ मनाकर इस अवसर के चित्रों को भी साझा किया। कहीं, छोटी-छोटी बालिकाएं मनु के रूप में दुल्हन बनीं दिखाई दीं तो कहीं बालकों को पोशाक पहनाकर गंगाधर राव के रूप में दूल्हा बनाया।
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के तत्वावधान में रानी के विवाह स्थल प्राचीन गणेश मंदिर में रंगबिरंगी विद्युत छटाएं बिखेरी गईं तथा दीपमालाएं सजाई गईं। कार्यक्रम में सामाजिक दूरी बनाकर कमेटी के चुनिंदा सदस्य ही उपस्थित रहे। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष राकेश पाठक, सचिव गजानन खानवलकर, मुख्य संयोजक मनमोहन गेड़ा, संयोजक राहुल खांडेकर, पीयूष रावत, अंकित राय, उत्तरा खेर, सुप्रिया खानवलकर, संगीता जोशी आदि उपस्थित रहीं। आभार सहसचिव उज्ज्वल देवधर ने जताया।
वहीं, युवा शक्ति संगठन व क्षत्रिय कलचुरी कलवार महासंघ के अध्यक्ष अजीत राय, तान्या राय, आनंद राय ने रानी के चित्र के समक्ष केक काटा और दीप प्रज्ज्वलित किए। पुलक जन चेतना मंच मुख्य शाखा एवं जैन महिला जागृति मंच मुख्य शाखा के दिनेश जैन डीके, संजय सिंघई, अलंकार जैन, ममता, प्रभा जैन, पूजा जैन, कल्पना आदि ने जरूरतमंद परिवारों को राशन किट वितरित कीं। बुंदेलखंड क्रांति दल के अध्यक्ष कुंवर सत्येंद्र पाल सिंह, अजय पाल सिंह, शैलजा सिंह, शरद प्रताप सिंह ने दीप जलाए। महारानी लक्ष्मीबाई जन्म दिवस समारोह महासमिति के तत्वावधान में अध्यक्ष रवीश त्रिपाठी, ऋषभ त्रिपाठी, महेश साहू ने कार्यालय में दीप प्रज्ज्वलित किए।