रोजा इफ्तार के वाद मगरिव की नमाज में दुआ मांगती महिलाएं।
रमजान की पहली शबेकद्र आज, घरों में जागकर करें इबादत
झांसी। रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरे में गुरुवार से रोजेदार एतकाफ पर बैठेंगे। यह लोग ईद का चांद निकलने के बाद ही मस्जिद से बाहर आते हैं। इसके अलावा इस अशरे में पांच ताक यानी नक्की रातें आती हैं। इन रातों को जागकर इबादत करने का सवाब हजार रातों के बराबर मिलता है। इस अशरे को जहन्नुम से निजात का भी कहते हैं। उलमा ने कहा कि इसलाम में शबेकद्र की बहुत ही अहमियत है। पहली शबेकद्र 20वें रोजे की रात को है। इसलिए घरों में मर्द और औरतें जागकर नफिल नमाजें, तिलावत और तसबीह पढ़कर अल्लाह से कोरोना वायरस से सभी को महफूज रखने, सभी की परेशानियों को दूर करने, बीमारों को शिफा देने की दुआ करें।
मुफ्ती साबिर कासमी ने कहा कि रमजान के आखिरी अशरे में 21, 23, 25, 27 और 29 की रातों में शबेकद्र होती हैं। इनकी बहुत ही फजीलत इसलाम में बताई गई है। अल्लाह के नबी भी इन रातों में जागकर इबादत करते थे। इन रातों में रोजेदारों की दुआएं भी कुबूल होतीं हैं। पहले तो मस्जिदों में शबेकद्र के लिए एहतेमाम किया जाता था लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन है। मस्जिदें भी बंद हैं। कुछ मस्जिदों में ही इमाम और मोअज्जिन ही नमाज पढ़ रहे हैं। सारी इबादतें घरों में ही हो रही हैं तो शबेकद्र पर भी घरों में ही इबादत करें। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं पूरी दुनिया में बीमारी की वजह से लोग परेशान हैं। इसलिए इसके खात्मे के लिए सभी लोग दुआ करें।
मुफ्ती इमरान नदवी ने कहा कि अल्लाह ने इन ताक रातों में ही कुरान नाजिल किया था। इन रातों को अल्लाह के नबी भी कुरान की तिलावत और नफिल नमाज पढ़ते थे। इसलिए सभी लोग इन रातों को ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। उन्होंने कहा कि रातों में जागकर इबादत के साथ अल्लाह से खूब दुआ भी मांगनी चाहिए। इस बार एतकाफ में भी बहुत ही कम लोग बैठ पाएंगे।