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सुबह 9.29 तक भद्रा, उसके बांध बांध सकेंगे राखी

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raksha bandhan
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झांसी। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व तीन अगस्त को है। इस दिन भद्रा की छाया सुबह 9.29 मिनट तक रहेगी। उसके बाद ही रक्षा सूत्र बांधने का मुर्हुत आरंभ होगा। फिर पूरे दिन तक मुर्हुत रहेगा।
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इस वर्ष सावन के आखिरी सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व पड़ रहा है। ज्योतिषचार्यों के मुताबिक श्रावण मास की पूर्णिमा होने के नाते भी इस दिन का खास महत्व हो जाता है। यह शुभ संयोग कई वर्षों के बाद पड़ता है लेकिन भद्रा का विचार करके ही रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। विद्घानों के मुताबिक भद्राकाल में रक्षासूत्र बांधने से क्लेश उत्पन होता है। यह मुर्हूत आनंद कारक नहीं होता। आचार्य शांतनु पांडेय के मुताबिक भद्रा में रक्षा सूत्र नहीं बांधा जाता। जबकि भद्राकाल के पश्चात पूर्णिमा एवं सर्वार्थ सिद्घि योग बनेगा। सिद्घि योग की वजह से इसकी अधिक मान्यता बताई जा रही है। विद्घानों का दावा है ऐसा मुर्हूत कई दशकों में आता है। इस बार भद्रा रविवार से आरंभ होकर सोमवार की सुबह 9.29 मिनट तक रहेगा। उसके बाद राहु काल समाप्त हो जाएगा। सुबह 9.30 मिनट से रक्षासूत्र बांधे जा सकते हैं। मान्यता है कि रक्षा सूत्र बांधने से पहले बहन एवं भाई को व्रत धारण करना चाहिए। सूत्र बांधने के साथ ही इस उपवास को तोड़ना चाहिए। उधर, रक्षाबंधन को लेकर बहनों ने अपनी तैयारियां आरंभ कर दी हैं।
चीनी राखियों का बाजार डाउन
चीन के साथ सीमा पर विवाद की छाया राखियों के बाजार पर भी जबर्दस्त तरीके से नजर आ रहा है। झांसी के बाजार में रंग-बिरंगी राखियां दिखाई पड़ रहीं लेकिन, चीन की राखियों का बाजार काफी सिमटा दिखाई पड़ता है। व्यापारियों का कहना है इस बार बाजार में स्थानीय राखियों की ही सर्वाधिक मांग अधिक है इनमें लुंबा एवं धागे सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। रेशम के रंगबिरंगे धागे एवं मोतियों से सजी राखियां लोग खूब पंसद कर रहे हैं लेकिन बच्चों के कैटेगरी में उनके कार्टून करेक्टरों की ही धूम दिखाई पड़ रही है। बच्चे सबसे अधिक डोरोमॉन, छोटा भीम, मोटू-पतलू समेत पबजी के कई करैक्टर्स की राखियां पंसद कर रहे हैं। इस दफे कीमतों में पिछले बार के मुकाबले इजाफा भी देखने को मिल रहा है। पिछली बार लुंबा के दाम करीब पंद्रह से बीस से शुरू होते थे लेकिन, इस बार इनकी कीमत करीब तीस रुपये से शुरू हो रही है। इसी तरह सामान्य धागे की राखियां के दाम में भी इजाफा हुआ है। खासतौर से राखी के लिए ज्वैलर्स की ओर से तमाम डिजायनर ब्रासलेट भी उतारे गए हैं।
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कोविड के चलते डाक का सहारा लेने वालों में इजाफा
जिन बहनों के भाई दूर-दराज रहते हैं उनके लिए डाक विभाग ही सहारा है। इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में इसके सहारे राखियां दूर-दराज तक भेजी जा रही हैं। कोरियर का भी तमाम लोग सहारा ले रहे हैं। लॉकडाउन एवं आवागमन के साधनों के बंद होने से डाक के जरिए राखियां भेजने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। हर बार की तरह डाक विभाग ने राखियों के वितरण के लिए अलग से इंतजाम किए हैं।
लुभा रही ऑनलाइन कंपनियों की पेशकश
लॉकडॉउन एवं आवागमन के साधनों के बंद होने की वजह से तमाम ऑनलाइन कंपनियों ने राखी को लेकर कई ऑफर भी बाजार में उतारे हैं। इनको भी लोग काफी पंसद कर रहे हैं। इनके जरिए राखी भिजवाने का सबसे अधिक फायदा कोरियर के झंझट से बचने में भी लोग कर रहे हैं।
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