झांसी। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के सॉफ्टवेयर को हैक करके तत्काल टिकटों पर सेंध लगाने वाले गिरोह के तार बांदा के नरैनी से पकड़े गए ई टिकट कारोबारी से जुड़े पाए गए हैं। ये गिरोह मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में काम कर रहा है। इस बात का पता लगने के बाद से रेलवे बोर्ड तक हड़कंप मच गया है। आरपीएफ क्राइम ब्रांच ने गिरोह के सरगना व अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया है। बुधवार को झांसी से टीम रवाना होगी।
आरपीएफ की क्राइम ब्रांच की टीम ने आठ नवंबर को बांदा के नरैनी निवासी संदीप वर्मा को प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का उपयोग कर अवैध रूप से ई टिकट बनाते पकड़ा था। उसके कंप्यूटर में पिछले एक महीने का रिकार्ड बरामद हुआ था। जिसमें पूर्व यात्रा के 58 टिकटों व आगामी नौ टिकट का लेखाजोखा पाया गया। जांच में जब परतें खुलीं तो क्राइम ब्रांच के होश उड़ गए। जांच में पता लगा कि उक्त अवैध कारोबारी के तार मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में बैठे हैकरों से जुड़े हैं। इस हैकर गिरोह ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर रखा है जिसने आईआरसीटीसी के ई टिकट के तत्काल टिकट प्रोग्राम को हैक कर रखा है। ये गिरोह तत्काल टिकट का समय शुरू होने से आधे घंटे पहले संबंधित अवैध कारोबारी के पास एक लिंक भेजता है। लिंक मिलते ही कारोबारी पहले से ही दो या तीन तत्काल टिकटों के फार्म ऑनलाइन भरकर तैयार रखता है। एक फार्म पर चार यात्रियों के टिकट बनते हैं। तत्काल टिकट खुलते ही लिंक की मदद से 20 सेकेंड के अंदर ही उक्त यात्रियों के कंफर्म टिकट बन जाते हैं।
उक्त कारोबारी पिछले दो साल से यह काम कर रहा था। त्योहार व अन्य पीक सीजन में कंफर्म टिकटों की मांग बढ़ जाती है। हैकर मुंबई व दिल्ली से अपना कारोबार संचालित कर रहे हैं। कारोबारी को लिंक मंगाने के बदले महीने में एक मुश्त रकम ऑनलाइन खाते में स्थानांतरित करनी पड़ती है। जबकि, उक्त कारोबारी मूल किराए के अतिरिक्त प्रत्येक सीट पर दो हजार रुपये अतिरिक्त वसूल रहा था। इस गिरोह ने तमाम शहरों के कई ई टिकट कारोबारियों को अपने धंधे में शामिल कर रखा है। आरपीएफ अब एक बड़ी सफलता की तरफ आगे बढ़ रही है। अगर गिरोह के मास्टर माइंड पकड़े गए तो करोड़ों रुपये के इस खेल का पर्दाफाश हो जाएगा। साथ ही, उक्त कारोबारी ने पिछले दो साल में कितने टिकट बनाए? इसका रिकार्ड आईआरसीटीसी से मांगा गया है।
सॉफ्टवेयर को हैक करने में माहिर
रेलवे के सभी सॉफ्टवेयर प्रोग्राम सेंटर फॉर रेलवे इंफोरमेशन सिस्टम (क्रिस) तैयार करता है। रेलवे की ई टिकट की व्यवस्था आईआरसीटीसी के हाथों में है। आईआरसीटीसी से लाइसेंस लेकर ही लोग ई टिकट बनाने का धंधा कर सकते हैं। चूंकि, जब यात्री को कंफर्म टिकट नहीं मिलता है तो उसके पास तत्काल के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है। संबंधित स्टेशन से ट्रेन खुलने के एक दिन पहले तत्काल टिकट बनते हैं। एसी कोच में सुबह दस बजे और स्लीपर के लिए सुबह 11 बजे से तत्काल टिकट बनते हैं। जालसाज उक्त सॉफ्टवेयर को हैक करके तत्काल सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। उनके गिरोह से जुड़े लोग चंद सेकेंडों में तत्काल सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। इधर, खिड़कियों पर आरक्षण कराने वाले यात्रियों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
बंगलूरू से पकड़ा गया था गिरोह
इसी तरह का एक गिरोह फरवरी 2020 में बंगलूरू से पकड़ा गया था। इस गिरोह के पास से 639 ई टिकट कारोबारियों के खाता नंबर मिले थे। इस गिरोह के तार दुबई से जुड़े पाए गए थे। दुबई में बैठा मास्टर माइंड ही गिरोह का संचालन बंगलूरू से करवा रहा था। इस गिरोह के पास से हर महीने करोड़ों का ई टिकट का अवैध कारोबार पकड़ा गया था।
कंफर्म टिकट दिलाने के लिए नामी है संदीप
बांदा के नरैनी से पकड़े गए ई टिकट कारोबारी संदीप वर्मा का ट्रेन में कंफर्म सीट दिलाने के लिए क्षेत्र में खासा नाम है। ट्रेन में सफर करने वाले लोगों को मालूम है कि किसी भी विषम हालत में कंफर्म सीट चाहिए तो संदीप से संपर्क कर लो।