झांसी। हरी झंडी मिलने के बाद भी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी और जिला अस्पताल में शुरू होने वाली एमआरआई जांच रेड सिग्नल पर खड़ी हैं। दो बड़ी मशीनों के नहीं लगने के कारण मरीजों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। जबकि, एक को केंद्र और दूसरी को प्रदेश सरकार की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। मंजूरी मिले हुए भी तीन-तीन साल से अधिक हो चुका है। इसके बावजूद किसी न किसी कारण के चलते इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
मेडिकल कॉलेज : 2016 से स्वीकृति पर टीसीसी की शुरुआत नहीं, रोगी बाहर भाग रहे
झांसी। मेडिकल कॉलेज में 2016 में केंद्र सरकार ने टर्सरी केयर कैंसर सेंटर (टीसीसी) की स्वीकृति दे दी थी। इसके लिए मशीन खरीदने के लिए 45 करोड़ रुपये देने पर भी हामी भर दी थी। मगर यह मामला शासन स्तर पर कुछ कारणों से लटका हुआ है। ऐसे में कैंसर मरीजों को रेडियोथेरेपी के लिए दूसरे शहरों की भागदौड़ करनी पड़ रही है।
झांसी मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज था, जिसे इस योजना की सौगात मिली। झांसी के साथ ही एसजीपीजीआई में भी टीसीसी की स्वीकृति मिली थी, वहां मशीनें भी आ गईं और रेडियो सर्जरी भी शुरू हो चुकी है। यदि झांसी में टीसीसी की शुरुआत हो जाएगी तो कैंसर रोगियों को बहुत अधिक लाभ मिलने लगेगा।
मगर मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग में रेडियोथेरेपी न होने के कारण मरीजों को लखनऊ, ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों का रुख करना पड़ रहा है। किसी को 20 तो किसी को 35 सिकाई तक होती है। इसमें 25 से 30 हजार रुपये खर्च आता है। जबकि, रहने और खाने पीने में भी मरीजों का काफी पैसा खर्च होता है। बताया गया कि टर्सरी केयर कैंसर सेंटर में 22-22 करोड़ रुपये की आधुनिक कोबाल्ट मशीन भी खरीदी जानी है। वहीं, इस मामले में उप प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि कागजी कार्रवाई पूरी हो गई है। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
जिला अस्पताल : 1500 स्कवायर फीट जगह का चयन न होने से फंसी एमआरआई जांच
झांसी। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में जिला अस्पताल में झांसी समेत 18 मंडल मुख्यालयों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर एमआरआई मशीन लगाने की स्वीकृति दे दी थी। इसके लिए 1500 स्कवायर फीट जगह की जरूरत थी। जगह का चयन न हो पाने के कारण यह जांच शुरू नहीं हो सकी है।
मौजूदा समय में जिला अस्पताल में एमआरआई जांच की सुविधा नहीं है। ऐेसे में मरीजों को जांच के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में कभी-कभी एमआरआई मशीन खराब भी हो जाती है। तब मरीजों के पास सिर्फ निजी केंद्रों के अलावा कहीं भी जांच कराने का विकल्प नहीं बचता है। चूंकि, निजी केंद्रों पर एमआरआई जांच लगभग सात हजार रुपये के आसपास होती है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए जांच कराना मुश्किल हो जाता है। कुछ को पैसे उधार भी लेने पड़ जाते हैं। प्रदेश सरकार ने 18 मंडल मुख्यालय के जिला अस्पतालों में एमआरआई जांच की सुविधा शुरू करने की स्वीकृति दे दी थी। इसमें झांसी का जिला अस्पताल भी शामिल है। पीपीपी मॉडल के आधार पर जिला अस्पताल में एमआरआई मशीन रखवाई जानी है। मगर 1500 स्कवायर फीट जगह का चयन न होने से मशीन नहीं लग पाई है।