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Jhansi News: पंप का सीएनजी डालने से इन्कार, 20 गाड़ियों ने चार घंटे देरी से उठाया कूड़ा

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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। घर-घर कचरा उठान करने वाली फर्म का करीब 30 लाख रुपये बकाया होने पर पंप संचालक ने सीएनजी देने से इन्कार कर दिया। मेयर ने संचालक को फोन करके सीएनजी देने के लिए कहा तब जाकर सीएनजी डलने के बाद 20 गाड़ियां चार घंटे देरी से कूड़ा उठान कर पाईं। इससे लोगों को परेशानी हुई।
महानगर में घर-घर कचरा उठाने के लिए नगर निगम की ओर से एक एजेंसी को ठेका दिया गया है। इसके एवज में हर महीने एजेंसी को करीब सवा दो करोड़ रुपये का भुगतान नगर निगम करता है लेकिन पिछले नौ महीने से फर्म का लगभग 20 करोड़ रुपये बकाया है। बताया गया कि कचरा संग्रहण करने के लिए 190 गाड़ियां लगी हुई हैं, जिनमें 54 सीएनजी वाहन हैं। भुगतान न होने से डीजल और सीएनजी की भी फर्म पर करीब 80 लाख रुपये उधारी हो गई है। पहले पेट्रोल पंप ने गाड़ियों में डीजल डालने से इन्कार कर दिया था। बाद में नगर निगम प्रशासन के कहने पर अब नियमित डीजल मिल रहा है।
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इसी तरह, सीएनजी पंप संचालक ने भी रविवार से गाड़ियों में सीएनजी डालने से मना कर दिया था। रविवार सुबह जब गाड़ियां पंप पहुंचीं तो सीएनजी नहीं डाली गई। बाद में महापौर बिहारी लाल आर्य को इसकी सूचना दी गई। मेयर ने पंप संचालक से फोन पर बात की और जल्द बकाये का भुगतान कराने का भरोसा दिया। इसके बाद गाड़ियों में सीएनजी डलनी शुरू हुई। सुबह छह बजे की जगह 10 बजे से पुराने शहर के कई मोहल्लों में 20 गाड़ियों ने कूड़ा उठान शुरू किया। शाम चार बजे तक कूड़ा उठाया गया। मेयर ने बताया कि अब गाड़ियों में नियमित सीएनजी डलेगी।

कचरा उठान में समस्या की शिकायतें हुईं दोगुनी
वाहनों को सीएनजी देने से पंप संचालक द्वारा पहले भी इन्कार किया जा चुका है। तब भी कई इलाकों में कूड़ा उठान प्रभावित हुआ था। इन सब कारणों से स्मार्ट सिटी लिमिटेड के हेल्पलाइन नंबर पर कचरा उठान की समस्या की शिकायतें भी दोगुनी हो गई हैं। पहले जहां हर माह डेढ़ सौ शिकायतें आती थीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है।
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एक-दो दिन में बढ़ेगी बजट की उपयोगिता अवधि : मेयर
महापौर बिहारी लाल आर्य ने कहा कि 15वें वित्त के 23.17 करोड़ रुपये की उपयोगिता अवधि शासन स्तर से एक-दो दिन में बढ़ा दी जाएगी। इसी सप्ताह बैठक करके बजट से कराने वाले काम और भुगतान की मंजूरी भी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि हर साल उपयोगिता अवधि बढ़ाने की मंजूरी मिल जाती है। इसमें किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। यह बजट खत्म नहीं होता है।
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