झांसी। चारों ओर मंदिर और बीच में जलाशय, ये स्थिति किसी भी स्थान को मनोरम बनाने के लिए काफी होती है। यही नजारा नगर की घनी आबादी के बीचोबीच स्थित पानी वाली धर्मशाला (तालाब) पर भी देखने को मिलता है, बावजूद यहां हालात इतर हैं। लगातार अनदेखी के चलते तालाब का पानी कीचड़ में तब्दील हो चुका है और इसकी ऊपरी सतह जलकुंभी से पटी पड़ी है। इसके विकास के लिए बनाई गई योजना कागजों में दफन होकर रह गई है।
पानी वाली धर्मशाला महानगर के वार्ड नंबर 56 में स्थित है। ये प्राचीन गणेश मंदिर से सटी हुई है। इसके अलावा इसके इर्दगिर्द हजारिया महादेव मंदिर, मां अन्नपूर्णा मंदिर समेत अन्य मंदिर भी स्थित हैं। तालाब के चारों ओर पुराने दौर की पक्की सीढ़ियां बनी हुई हैं। तकरीबन बीस फीट गहरे इस तालाब की निचली सतह का फर्श भी पक्का है। निचली सतह पर बावड़ी और कुएं हैं, जो धर्मशाला के पानी के प्रमुख स्रोत हैं। आसपास मंदिरों की वजह से यहां साल भर श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है। लेकिन, धर्मशाला की दशा को देखकर सभी को निराशा होती है। कीचड़युक्त पानी से उठने वाली बदबू की वजह से लोग नाक मुंह सिकोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। देखने में ये तालाब लगता ही नहीं, क्योंकि इसकी ऊपरी सतह जलकुंभी से पटी होने की वजह से हरीभरी नजर आती है। जबकि, इसका विकास कर आसानी से एक अच्छे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाता है।
दो साल पहले हुई थी सफाई
नगर निगम द्वारा दो साल पहले पानी वाली धर्मशाला के विकास की योजना बनाई गई थी। इसके तहत इसके गंदे पानी को निकाला गया था। सतह तक सफाई कर कीचड़ निकाला गया था। इस पर बीस लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई थी। इससे पहले की योजना आगे बढ़ पाती, बारिश शुरू हो गई और धर्मशाला में एक बार फिर गंदा पानी जमा हो गया। इसके बाद पलटकर इसकी ओर नहीं देखा गया। हालांकि, स्मार्ट सिटी योजना के तहत इसके विकास की बात तो कही जा रही है, परंतु अब तक इस दिशा में कोई प्रभावी पहल होती नजर नहीं आई है।
चंदेलकालीन तालाब का मराठाओं ने किया विकास
ऐतिहासिक मान्यता है कि पानी वाली धर्मशाला का निर्माण चंदेलकाल में हुआ था। लेकिन, बाद में इसका विकास मराठाओं ने कराया। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि बुंदेलाकाल से पहले ये कच्चा तालाब हुआ करता था। मराठा काल में गणेश मंदिर और हजारिया महादेव मंदिर का निर्माण हुआ। इसी दौर में धर्मशाला का विकास हुआ।
दो दशक पहले तक पानी वाली धर्मशाला में आसपास के लोग तैराकी किया करते थे। लेकिन, अब गंदगी की वजह से पास से गुजरना भी मुश्किल होता है। शहर के बीचोबीच स्थित इस पुरातात्विक स्थल का विकास किया जाना चाहिए।
- ताहिर खान, व्यापारी
पहले सुबह शाम लोग पानी वाली धर्मशाला के इर्दगिर्द मछलियाें को दाना चुगाने के लिए जमा हो जाते थे। पितृ पक्ष में पितृों का तर्पण भी लोग यहां किया करते थे। लेकिन, अब स्थिति इतर है। गंदगी की वजह से लोग पास जाने से भी कतराते हैं।
- राघव वर्मा, व्यापारी
पानी वाली धर्मशाला को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके पानी की सफाई कराकर फव्वारा, वोटिंग व आसपास लाइट लगाने से इसका रूप एकदम से बदल जाएगा। नगर निगम को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
- राहुल शर्मा, अधिवक्ता
पानी वाली धर्मशाला पुरातात्विक धरोहरों में से एक है। बावजूद, ये अनदेखी की शिकार है। नगर निगम द्वारा इसके विकास की बड़ी योजना बनाने की बात की जा रही है। लेकिन, सफाई जैसे छोटे काम भी नहीं किए जा रहे हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
- मोहनलाल सुमन, शिक्षक
पानी वाली धर्मशाला का विकास स्मार्ट सिटी योजना के तहत किया जाना है। इसे पर्यटन के बड़े स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना का खाका तैयार कर लिया गया है।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर