अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता :100 मिलियन स्माइल्स’ और मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को ‘मनोवैज्ञानिक परामर्श शिविर’ का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों की विभिन्न समस्याओं का मनोवैज्ञानिक ढंग से समाधान किया गया। शिविर में कोई खुद अपनी समस्या लेकर पहुंचा, तो कोई अपने किसी परिजन की परेशानी से सुलझाने पहुंचा।
इलाइट-सीपरी रोड स्थित नेशनल हाफिज सिद्दीकी इंटर कॉलेज में आयोजित शिविर में मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एल के सिंह ने कहा कि हम में से कई लोग ऐसे हैं, जो किसी न किसी मनोवैज्ञानिक विकार से ग्रसित हैं। लेकिन, इन्हें मनोवैज्ञानिक समस्या न मानते हुए, आदत मान लिया जाता है, जिससे इसका उपचार नहीं हो पाता। जैसे किसी में बार-बार हाथ धोने की आदत होती है, तो कोई घर की धुलाई करता रहता है। ये स्थिति सामान्य नहीं है। इसका समाधान मनोविज्ञान के माध्यम से संभव है। परिवार के लोग ऐसे व्यक्ति को रोकें नहीं, मना करने से वे मानने वाले नहीं हैं। बल्कि, इस समस्या से ग्रसित लोगों का मन भटकाने की कोशिश करें। ऐसे लोगों को बेहद तकलीफदेह और बहुत सुखद दृश्यों का सामना कराएं। साथ ही उनकी बात को गंभीरता से लें, ताकि ऐसे लोगों को इस बात का एहसास हो कि उन्हें इज्जत मिल रही है। साथ ही मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी लेते रहें, ये विकार दूर हो जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने अन्य समस्याओं के मनोवैज्ञानिक ढंग से समाधान के तरीके भी बताए। शिविर सुबह साढ़े दस बजे लेकर शाम साढ़े चार बजे तक जारी रहा। दिन भी लोगों का आवागमन लगा रहा। कोई खुद की समस्या लेकर पहुंचा, तो कोई अपने बच्चों की आदतों से आजिज आकर मनोवैज्ञानिक समाधान खोजने पहुंचा।
दूर हो जाएगी मोबाइल गेम की आदत
शिविर में कई लोग ऐसे आए, जो अपने बच्चों की मोबाइल गेम खेलने की आदत से परेशान थे। उन्हें बताया कि ऐसे बच्चों को रोकने के लिए सख्ती करना ठीक नहीं होता है, ऐसे में वे और भी जिद्दी हो जाते हैं। बेहतर होगा कि इस तरह के बच्चों को मोबाइल और इंटरनेट पर किसी अन्य सकारात्मक कार्यों में चतुराई के साथ व्यस्त करें। साथ ही उनका टाइम टेबल निर्धारित कर दें, जिससे मोबाइल /इंटरनेट का भी समय निर्धारित हो। इससे आदत में धीरे-धीरे सुधार होगा। साथ ही समय समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लें।
- निधि चौहान, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता
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नकारात्मक विचार से होता है अवसाद
मानसिक अवसाद नकारात्मक विचारों से होता है। इससे आत्मविश्वास कमजोर होता चला जाता है। अवसाद ग्रसित लोगों को नींद कम आती है, घबड़ाहट होती है, खाना पीना अच्छा नहीं लगता, अकेलापन भाता है। अवसाद ग्रसित व्यक्ति को जीवन के अलग-अलग रंग दिखाए जाएं। कभी ऐसे स्थान पर ले जाया जाए, जहां के दृश्य उत्साहजनक हों और कभी अस्पताल जैसे करुण स्थलों पर भी ले जाया जाए। घर परिवार का प्यार उन्हें दिखाया जाए, तो झगड़े से भी परिचित कराया जाए। बनावटी दृश्य पैदा करने से भी पीछे नहीं हटें। लगातार मनोवैज्ञानिक परामर्श लेते रहें।
- दीपक गुप्ता, तकनीकी सहायक - मनोविज्ञान केंद्र
फोन पर लें परामर्श
मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. एल के सिंह ने बताया कि लोग उनसे फोन पर भी परामर्श ले सकते हैं। सुबह दस से शाम पांच बजे के बीच फोन नंबर 9415948872 पर फोन कर सकते हैं। समस्या ज्यादा गंभीर होने पर उन्हें पंचकुइयां स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र भी बुलाया जाएगा।