झांसी। ट्रैकमैन कर्मचारियों ने सोमवार को कोरोना से बचाव को लेकर कई घंटे काम बंद रखा। उन्होंने सहायक मंडल अभियंता कार्यालय पर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि कोरोना वायरस को लेकर उनको कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं जा रहीं हैं। न तो उनको मास्क दिए गए हैं और न ही सेनेटाइजर दिए गए हैं।
कोरोना वायरस से बचाव के लिए दूसरे कर्मचारियों की तरह सुविधाएं न मिलने से नाराज ट्रैकमैनों ने सोमवार को काम बंद कर सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट के पास स्थित सहायक मंडल अभियंता कार्यालय पर एकत्रित हो गए। कर्मचारियों का कहना था कि रेल ट्रैक के पास पड़े रहने वाले मल- मूत्र संक्रमित जगह पर काम करना पड़ता है। मगर कोरोना वायरस महामारी घोषित होने के बाद भी उनको मास्क, सैनेटाइजर व गिलब्स उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। जबकि, दूसरे कर्मचारियों को यह सुविधाएं उपलब्ध करा दी गईं हैं। इस पर सहायक मंडल अभियंता ने जल्द ही सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
ट्रैकमैन पटरियों पर काम करते हैं। यह रेल संरक्षा से जुड़ा काम है। इसलिए ट्रैकमैनों को एक साथ छुट्टी नहीं दी जा सकती है। उनको दूर- दूर रहकर काम करने के लिए कहा गया है। साथ ही वैकल्पिक रूप से छुट्टी देने पर विचार चल रहा है। हाथ धोने की जगह सैनेटाइजर रखा जा रहा है। मास्क के लिए ऑर्डर दे रखा है। उपलब्ध होते ही कर्मचारियों को बांट दिए जाएंगे।
संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक।
कोरोना वायरस के चलते बिना किसी सेफ्टी टूल्स के काम करने पर हमेशा डर बना रहता है। उनकी समस्या को समझना चाहिए।
शुभम।
ट्रैक मेंटेनर मेें 50 से 55 साल की उम्र के कर्मचारियों की संख्या अधिक हैं। कम से कम ऐसे कर्मचारियों का तो ध्यान रखना चाहिए।
सलमान।
कई कर्मचारी शुगर, हाई ब्लड प्रेशर जैसे रोगों से प्रभावित हैं। ऐसे कर्मचारियों को संक्रमित होने का ज्यादा खतरा रहता है।
कैलाश।
वे कोई विरोध नहीं कर रहे हैं। केवल रेल प्रशासन से आग्रह करने आए हैं कि उनको भी दूसरे कर्मचारियों की तरह सेफ्टी टूल्स दिए जाएं।
शरद।