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कोरोना मरीजों के इलाज में रुचि नहीं दिखा रहे निजी अस्पताल

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privet hospital not intrasted in corona treatment
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झांसी। कोरोना के मरीजों को भर्ती कर उपचार करने में निजी अस्पताल/ नर्सिंगहोम रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कई बार प्रशासन, नर्सिंगहोम और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ बैठक हो चुकी है लेकिन इसका कोई परिणाम निकलकर नहीं आया है। बताया गया कि दो दिनों में आईएमए और नर्सिंगहोम एसोसिएशन रणनीति बनाएंगे।
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जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों के चलते मेडिकल कॉलेज में संसाधन कम पड़ने लगे हैं। हालात ये है कि कोविड पॉजिटिव आईसीयू फुल हो जाता है तो ऐसे में संदिग्ध मरीजों का उपचार करने में समस्या खड़ी हो जाती है। मरीज को बेड के लिए कोविड अस्पताल की बिल्डिंग में इंतजार करना पड़ता है। इस बीच जान पर जोखिम बना रहता है। ऐसे में आईएमए और नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अधिकारियों के साथ हुई प्रशासन की बैठक कर कई बार निजी अस्पताल में मरीजों का उपचार करने को लेकर चर्चा हुई लेेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं निकला है। यदि दूसरे शहरों की तरह झांसी के निजी अस्पताल भी कोरोना मरीजों का उपचार करने के लिए तैयार हो जाते हैं तो झांसी के मरीजों के लिए बड़ी राहत होगी।
शासन तय कर चुका है रेट
शासन की तरफ से निजी अस्पतालों के लिए शुल्क तय किया जा चुका है। श्रेणी-ए के शहरों में एनएबीएच से अप्रमाणित निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों को सपोर्ट केयर सिस्टम से युक्त आइसोलेशन बेड में भर्ती करने के एवज में आठ हजार रुपए रोजाना के हिसाब से शुल्क ले सकेंगे, जिसमें 1,200 रुपए पीपीई किट के भी शामिल हैं. वहीं गंभीर मरीजों को बिना वेटिंलेटर वाले आइसीयू बेड पर भर्ती करने के एवज में 13 हजार रुपए प्रतिदिन चार्ज कर सकेंगे, जिसमें पीपीई किट का दाम भी शामिल है। अति गंभीर मरीज जिन्हें वेंटिलेटर युक्त आइसीयू बेड पर भर्ती किया जाएगा। उनसे 15 हजार रुपए प्रतिदिन की दर से शुल्क लिया जाएगा। इसमें भी पीपीई किट का दाम शामिल है। झांसी बी श्रेणी में आता है और शासनादेश में बी और सी श्रेणी के नगरों में स्थित सुपर स्पेशियलिटी के अस्पताल ए श्रेणी के अस्पतालों के लिए तय दरों का क्रमश: 80 प्रतिशत और 60 प्रतिशत शुल्क ही ले सकेंगे।
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सभी लोग कोरोना मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार हैं मगर कुछ मांगें हैं। जल्द ही नर्सिंगहोम एसोसिएशन और आईएमए के अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बना ली जाएगी। - निलय जैन, सचिव, नर्सिंगहोम एसोसिएशन।
सोमवार को आईएमए और नर्सिंगहोम एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई है। इसमें तय कर लिया जाएगा कि कोरोना मरीजों का उपचार कैसे करना है। जिसकी भी जो मांगें हैं, उन पर भी चर्चा होगी। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, अध्यक्ष, आईएमए, झांसी।
डीएम बोले-कोरोना के गंभीर मरीज बढ़ रहे, इलाज के लिए आगे आएं
झांसी। विकास भवन में आईएमए /प्राइवेट नर्सिंग होम के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें डीएम आंद्रा वामसी ने कहा कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं। ऐसे में कोविड मरीजों के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल आगे आएं।
कोविड मरीज प्राइवेट नर्सिंग होम में इलाज कराना चाहते हैं परंतु इलाज नहीं हो रहा है। जबकि, प्राइवेट एलटी काम कर रहे हैं तो डॉक्टर क्यों नहीं कर सकते। सुझाव दिया कि पैरामेडिकल कॉलेज में एक ब्लॉक आरक्षित करते हुए पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध करा देंगे। वहां कोविड हॉस्पिटल संचालित करें। उन्होंने कहा कि 750 एंटीजन किट दी थी, उनकी रिपोर्ट अभी तक नर्सिंग होम से नहीं मिली है। नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एके सांवल ने कहा कि जल्द ही नर्सिंगहोम व आईएमए एसोसिएशन से बात कर पैरामेडिकल कॉलेज में कोविड हॉस्पिटल के संचालन की जानकारी देंगे। उन्होंने प्राइवेट एलटी को मानदेय देने की बात कही, जिस पर सहमति बन गई। बैठक में सीडीओ शैलेष कुमार, डॉ. एनएस सेंगर, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, निलय जैन मौजूद रहे।
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