झांसी। झांसी और ललितपुर जिलों में पुराने दिग्गज नेताओं के बेटे अपने पिता की सियासी विरासत संभालने को तैयार हैं। कुछ इस चुनाव में पिता की जगह अपनी किस्मत आजमा रहे हैं तो कुछ चुनाव प्रचार में ताकत झोंककर राजनीति का श्रीगणेश कर रहे हैं। यशपाल यादव, राहुल रिछारिया, चंद्र भूषण सिंह बुंदेला गुड्डू राजा अपने पिता की राजनीतिक विरासत के सहारे चुनाव मैदान में हैं। वहीं वीरेंद्र प्रताप सिंह यादव और दीपांकुर यादव अभी प्रचार में हाथ आजमाकर चुनावी दंगल कैसे फतह किया जाता है इसकी ट्रेनिंग में लगे हुए हैं।
सपा से एक बार विधायक व दो बार सांसद रहे चंद्रपाल सिंह यादव के बेटे यशपाल सिंह इस चुनाव में बबीना विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी हैं। उन्हें अपनी मेहनत के साथ अपने पिता की राजनीतिक विरासत पर भरोसा है। पिछले चुनाव में भी यशपाल सपा से इसी सीट से चुनाव लड़े थे पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह झांसी सदर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राहुल रिछारिया के पिता ओमप्रकाश रिछारिया झांसी से विधायक व कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री रह चुके हैं। राहुल के दादा गोविंद रिछारिया भी यहां से सांसद रह चुके हैं।
ललितपुर जिले की सदर विधानसभा सीट से मैदान में चंद्रभूषण सिंह बुंदेला गुड्डू राजा के पिता सुजान सिंह बुंदेला दो बार झांसी-ललितपुर सीट से कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं। इंदिरा गांधी के समय से कांग्रेस में रहे सुजान सिंह के सोनिया गांधी से संगठनात्मक चुनाव को लेकर मतभेद हो गए थे और उन्हें कांग्रेस से किनारा करना पड़ा था। उनके पुत्र गुड्डू राजा एक बार पहले भी सपा से चुनाव लड़ चुके हैं पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी, इस बार वह ललितपुर सदर सीट से बसपा के टिकट पर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। उनके पिता सुजान सिंह बुंदेला भी उनके लिए चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
उधर. समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष छत्रपाल सिंह यादव के पुत्र वीरेंद्र प्रताप सिंह वीरू बबीना क्षेत्र से सपा से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने पर सपा छोड़ वह भाजपा में शामिल हो गए हैं। इन दिनों वह बबीना क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। गरौठा क्षेत्र के पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह व निवाड़ी की पूर्व विधायक श्रीमती मीरा यादव के पुत्र दीपांकर यादव इन दिनों गड़ूका से लेकर भरोसा तक अपने पिता सपा उम्मीदवार दीपनारायण सिंह के पक्ष में नुक्कड़ सभाएं करते नजर आ रहे हैं। सियासी क्षेत्र में उनकी इन सभाओं को लोग दीपांकर का सियासी पूर्वाभ्यास मान रहे हैं।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
सियासत के मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे इन नए चेहरों के साथ दिग्गज नेता रहे उनके पिता की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। कई चुनावों में अपनी जीत का परचम फहराने वाले इन नेताओं के सामने अपने बेटों को जिताकर लाना नाक की बात बन गई है। पूर्व सांसद चंद्रपाल सिंह यादव, सुजान सिंह बुंदेला हो या फिर पूर्व मंत्री ओमप्रकाश रिछारिया सभी अपने वारिसों को जिताने के लिए चुनाव प्रचार में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि किसके सर ताज सजता है और किसे मायूसी मिलती है।