संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के सरकारी शिक्षक की बेटी बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के दबाव पर घर से भाग निकली। बस से पहले वह ग्वालियर पहुंची। यहां रेलवे स्टेशन से मुंबई का टिकट लेकर ट्रेन में सवार हो गई। लेकिन झांसी में सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद चाइल्ड लाइन ने बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। यहां समझाने के बाद उसे पिता के साथ घर भेज दिया गया।
मुरैना के एक गांव की रहने वाली 12वीं की छात्रा पर शिक्षक पिता ने दबाव बनाया कि इस बार बोर्ड परीक्षा में उसके 70 फीसदी अंक आने चाहिए, लेकिन उसके पर्चे इतने अच्छे नहीं रहे कि इतने नंबर आ सकें। वह निराश हो गई। हताशा इतनी बढ़ी कि बोर्ड का अंतिम पर्चा देकर पिता के डर से उसने घर छोड़ दिया। शनिवार को वह मुरैना से बस द्वारा ग्वालियर पहुंची। यहां से शाम में मुंबई की ट्रेन में जा बैठी। रास्ते में यात्रियों को शक हुआ तो सूचना आरपीएफ को दी गई। उसे झांसी में उतार लिया गया। चाइल्ड लाइन ने रविवार सुबह उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया।
समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा व सदस्य कोमल सिंह, परवीन खान, दीप्ति सक्सेना और हरिकृष्ण सक्सेना ने काउंसलिंग की। उसे समझाया कि कम नंबर आए तो कोई बात नहीं लेकिन घर नहीं छोड़ना है। समिति ने मुरैना से उसको पिता को बुलाया और समझाया कि बेटी पर अच्छे नंबर लाने का दबाव न डालें। शिक्षक पिता ने अपनी गलती स्वीकार की और उसे घर ले गए।