झांसी। अभी तक हाउसटैक्स के दायरे से बाहर चल रहे 27000 भवनों से भी टैक्स वसूलने की तैयारी की जा रही है। इनमें अधिकांश भवन शहर के बाहरी इलाकों के हैं। नगर निगम को हस्तांतरित जेडीए कॉलोनियां भी टैक्स दायरे में आएंगी। कार्यकारिणी से इजाजत मिलने के बाद नगर निगम प्रशासन ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। सर्वे के बाद भवन स्वामियों को नोटिस भेजी जाएगी। दो माह बाद से आरंभ होने वाले नए वित्तीय वर्ष से इनका गृहकर तय हो जाएगा।
नगर निगम अभी 1.20 लाख भवनों से ही हाउसटैक्स वसूलता है जबकि शहरी सीमा में बीस साल पहले इजाफा हो चुका है। शहरी सीमा बढ़ने के बावजूद हाउसटैक्स देने वाले भवनों की संख्या नहीं बढ़ी। जेडीए की कई आवासीय कॉलोनियों का रखरखाव भी निगम को मिल गया लेकिन, इन कॉलोनियों में टैक्स नहीं लगाया गया। शहरी सीमा के भीतर कई प्राइवेट कॉलोनियां भी नगर निगम को हाउसटैक्स नहीं चुकातीं। निगम अफसरों की लापरवाही के चलते अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया था। कार्यकारिणी में मामला उछलने के बाद अब निगम प्रशासन ने कवायद शुरू की है।
नगर निगम के ही सर्वे के मुताबिक शहर में 1.47 लाख भवन हैं। अब निगम प्रशासन इसके आधार पर नए भवनों से टैक्स वसूलने की तैयारी में है। नगर आयुक्त ने ऐसे भवन चिन्हित करने को कहा है कि जो टैक्स नहीं चुका रहे हैं। इस काम को अगले वित्तीय वर्ष से पहले पूरा कर लिया जाना है। आवासीय के साथ ही नए व्यावसायिक भवनों को भी टैक्स दायरे में लाया जाएगा। अभी निगम को करीब बीस हजार व्यावसायिक भवन ही टैक्स चुका रहे हैं लेकिन, सर्वे में मालूम चला कि निगम सीमा के भीतर 35980 भवनों मेें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। आय बढ़ाने के लिए भवनों को व्यावसायिक श्रेणी में लाने की तैयारी है। अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि कार्यकारिणी में पारित प्रस्ताव के मुताबिक कार्रवाई शुरु कराई गई है।