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Jhansi News: नौकरी सरकारी पर प्रैक्टिस निजी

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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद भी मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। कुछ अपने तो अधिकतर दूसरों के नर्सिंगहोम में उपचार करते हैं। जिम्मेदार अफसर चेतावनी पत्र जारी कर चुके हैं मगर हालात जस के तस हैं। वहीं, डीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों की निगरानी शुरू कर दी है, जिसमें विजिलेंस को भी शामिल किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज के आसपास सैकड़ों नर्सिंगहोम हैं। इनमें मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों के अधिकतर चिकित्सक नियमित तौर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। बड़े-बड़े ऑपरेशन भी नर्सिंगहोम में सरकारी चिकित्सकों की ओर से किए जा रहे हैं। इनके एवज में मोटी फीस वसूली जा रही है। कुछ चिकित्सक तो ऐसे हैं कि सरकारी ड्यूटी से ज्यादा समय अपने नर्सिंगहोम में बिताते हैं।कई ने अपने नर्सिंगहोम बना लिए हैं, जहां रोगियों के उपचार और सर्जरी किए जा रहे हैं। निजी प्रैक्टिस करने वालों चिकित्सकों की जिस दिन मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पताल में ओपीडी होती है, उस दिन दोपहर दो बजे के बाद नर्सिंगहोम में रोगियों का उपचार करते हैं। जिस दिन ओपीडी नहीं होती, उस दिन सुबह 11 बजे से निजी प्रैक्टिस शुरू हो जाती है।दूसरी ओर, शासन की सख्ती के चलते निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर निगरानी के लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसमें विजिलेंस को भी शामिल किया गया है। विजिलेंस टीम निगरानी कर अपनी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए सौंपेगी।
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