अमर उजाला ब्यूरो
झांसी /आगरा। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से बर्खास्त अवर अभियंता अम्बरीश गाैतम (48) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अपने पीछे कई सवाल छोड़ दिए हैं। इन सवालों के जवाब के लिए पुलिस उनके कमरे से मिली डायरी को खंगाल रही है। पुलिस उनसे बात करने वालों का पता लगाने के लिए उनके मोबाइल नंबर की सीडीआर भी निकालेगी। वहीं, परिजन अम्बरीश की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। भाई अंकुर का आरोप है कि विश्वविद्यालय में 200 करोड़ के घपले की शिकायत करने पर उनकी हत्या हुई। हालांकि उनकी मौत की सटीक वजह विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। न्यूनतम दो सप्ताह के बाद रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर से अम्बरीश का शव शुक्रवार रात बरामद हुआ था। बिस्तर पर वह औंधे मुंह पड़े थे। भाई अंकुर गाैतम ने बताया कि 20 मई को अम्बरीश और भाभी पूनम बेटे यशांक को लेकर कोटा गए थे। 3 जुलाई को अम्बरीश झांसी लौट आए। 4 जुलाई की सुबह 9:30 बजे उनकी पूनम से बात हुई। परिजनों का कहना है उस दौरान वह पूरी तरह ठीक थे। उसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। बहुत देर तक फोन स्विच ऑफ रहने पर पूनम ने पड़ोसियों को घर भेजा। घर में अंदर से कुंडी बंद थी। आरोप है उनको विषाक्त पदार्थ दिया गया। इसके बाद घर की तलाशी ली गई। अटैची को खोलकर देखा गया। अटैची कंप्यूटर टेबल पर रखी थी। दोनों अलमारी के ताले भी खुले हुए थे। बेडशीट हटी हुई थी। आवास के अंदर बाथरूम में ग्लब्स पड़े हुए थे, जबकि घर में किसी तरह के ग्लब्स नहीं थे। पुलिस इन सब बातों से इन्कार कर रही है। नवाबाद पुलिस का कहना है शरीर पर किसी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं थे। जहरीले पदार्थ के सेवन के भी शरीर में कोई लक्षण नहीं मिले हालांकि मामले के संवदेनशील होने से डॉक्टरों के पैनल से न सिर्फ पोस्टमार्टम कराया गया बल्कि बिसरा एवं हार्ट को भी विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया है।
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अभी तक की छानबीन में कोई भी संदिग्ध बात प्रकाश में नहीं आई। जहां उनका शव मिला, वह अंदर से बंद था। उनके कमरे से डायरी मिली है, उसमें उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में लिखा है। डायरी को खंगाला जा रहा है। मौत की सही वजह एफएसएल की रिपोर्ट आने पर ही मालूम चल सकेगी। एफएसएल से जल्द ही रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। - बीबी जीटीएस मूर्ति, एसएसपी
ताजगंज स्थित श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
अम्बरीश का अंतिम संस्कार रविवार सुबह ताजगंज स्थित श्मशान घाट पर हुआ। बेटे यशांक ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्य मौजूद थे।पिता समेत पत्नी एवं अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
इनसेट
विशेष सचिव का आदेश भी ठंडे बस्ते में
नवंबर 2019 में विशेष सचिव ने अधिकारी-कर्मियों पर कार्रवाई के दिए थे आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बीयू के बर्खास्त जेई अम्बरीश गौतम ने भ्रष्टाचार की कई शिकायतें की थी। इसकी विजिलेंस जांच हुई। विजिलेंस टीम ने रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। इस पर विशेष सचिव ने नवंबर 2019 में कुलसचिव को जेई रतन कुमार सिंह (गत वर्ष मौत हुई), विनय वाष्णेय कंप्यूटर ऑपरेटर, व्यास नारायण कुलसचिव, पीएन प्रसाद उप कुलसचिव, अखिलेश चंद्र उप कुलसचिव, संजीव पाठक और अशोक कुमार चौहान केयर टेकर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और इसे लोक सेवकों के व्यक्तिगत अभिलेख में दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन यह फाइलों में दब कर रह गया। तब से कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए हैं तो कई आज भी प्रभावशाली पदों पर तैनात हैं।
चर्चा का विषय बने अम्बरीश के वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर अम्बरीश का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह तत्कालीन कुलसचिव से अपने रुपये लौटाने का अनुरोध कर रहा है। वह कह रहा है कि वेतन न मिलने की वजह से उसके पुत्र का दाखिला नहीं हुआ है। बताते हैं कि इसके बाद तत्कालीन कुलसचिव ने कुछ धनराशि वापस की थी। वहीं, दूसरा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अम्बरीश प्रमोशन के नाम पर रुपये मांगने का आरोप लगा रहा है।
सोशल मीडिया पर कइयों ने खोली बीयू की कलई
झांसी। भाजपा सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके डॉ. रविंद्र शुक्ला की फेसबुक पर पोस्ट के बाद लोगों ने बीयू प्रशासन पर जमकर आरोप जड़े हैं, जो रविवार को चर्चा के केंद्र में रहे। सोशल मीडिया पर विनय खरे ने लिखा - आजकल किसी के स्वार्थ के अनुसार काम नहीं करते हैं तो षड्यंत्र के तहत दोषी बना दिया जाता है। अनूप तिवारी ने कहा - ‘मंत्री जी, मेरी एमए की कॉपी सेंटर द्वारा बदली गई। जिस पर बीयू के परीक्षा नियंत्रक से शिकायत की तो जांच कमेटी गठित की गई। जांच रिपोर्ट दे दी गई मगर जिम्मेदारों ने दोषियों से मिलीभगत करके मामले को दबा दिया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इतना भ्रष्टाचार हैं विश्वविद्यालय में’।
नीरज त्रिपाठी ने कहा - ‘पिछले चार सालों में अवसाद के कारण विवि के कई कर्मचारी किसी न किसी कारण मौत की दहलीज तक पहुंच गए लेकिन फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। संजीव तिवारी ने लिखा - ‘बीयू के इंजीनियर रतन सिंह की आकस्मिक मृत्यु के बाद अप्रत्याशित रूप से अम्बरीश गौतम की मृत्यु से व्यथित और दुखी हूं। एक वर्ष में दो इंजीनियर साथियों का निधन हुआ है। परवेज आलम ने लिखा - ‘न्याय सिर्फ पैसे वालों को मिलता है’। सचिन बिरथरे ने लिखा ‘बालू, गिट्टी, जमीन सब खा रहे हैं’।