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झांसी में सफल साबित हो रही प्लाज्मा थेरेपी, 70 फीसदी कोविड मरीज स्वस्थ

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झांसी। झांसी में प्लाज्मा थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक 70 कोविड मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया है, इसमें से 70 फीसदी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते प्लाज्मा चढ़ा दिया जाए तो मरीज कोरोना को मात दे सकता है।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों की प्लाज्मा थेरेपी लगभग दो महीने से की जा रही है। प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा संक्रमित मरीज को चढ़ाया जाता है। इसके बाद मरीज के शरीर में कोविड से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगती है। धीरे-धीरे मरीज कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो जाता है। हालांकि, प्लाज्मा थेरेपी में समय का बहुत अहम रोल है। यदि कोरोना संक्रमित होने के शुरुआती दौर में मरीज को प्लाज्मा चढ़ा दिया जाए, तो उसके स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं, संक्रमण के फेफड़े आदि को काफी नुकसान पहुंचाने के बाद प्लाज्मा थेरेपी भी कारगर साबित नहीं होती है। मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज के 70 रोगियों की प्लाज्मा थेरेपी की जा चुकी है। इसमें 70 फीसदी यानी 50 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।
कब दान कर सकते प्लाज्मा?
डॉक्टरों ने बताया कि कोविड की रिपोर्ट निगेटिव आने के 14 दिन बाद या फिर कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 28 दिन बाद व्यक्ति मेडिकल कॉलेज में संपर्क कर अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। प्लाज्मा दान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं होती है।
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प्लाज्मा थेरेपी के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। थेरेपी होने के बाद लगभग 70 फीसदी मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। प्लाज्मा थेरेपी में समय का काफी अहम रोल होता है। ऐसे में कोविड संक्रमित मरीज उपचार शुरू कराने में देरी न करें। - डॉ. पारस गुप्ता, सहायक नोडल अधिकारी, कोविड, मेडिकल कॉलेज।
जो भी व्यक्ति कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। वह अपना प्लाज्मा दान जरूर करें। इससे किसी मरीज की जान बच सकती है। प्लाज्मा दान करने में डरें या हिचकें नहीं, क्योंकि एक बार कोरोना होने के बाद एंटीबॉडी बनने से व्यक्ति जल्दी दोबारा संक्रमित नहीं होता है। - डॉ. मयंक सिंह, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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