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Jhansi News: पेन ड्राइव, व्हाट्स एप, फेसबुक बने सबूत, नए कानून में बदली विवेचना की तस्वीर

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। दो साल पहले लागू हुए नए कानून ने डेढ़ सौ साल से अधिक पुरानी पुलिस विवेचना के तौर तरीके बदल दिए। आपराधिक मामलों की विवेचना में अभी तक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का महत्व नहीं था लेकिन, अब पेन ड्राइव, व्हाट्स एप चैट, फेसबुक पोस्ट, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यू ट्यूब समेत वैज्ञानिक रीति से जुटाए साक्ष्य विवेचना के जरूरी हिस्सा बन गए। कोर्ट के फैसले तक पहुंचने में इनकी भूमिका अहम हो गई है।

एक जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हुए। भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने साक्ष्य के तौर पर डिजिटल साक्ष्य को कानूनी मान्यता दे दी। कोर्ट के सामने पेश होने वाली चार्जशीट में यह डिजिटल साक्ष्य भी शामिल रहते हैं। पहले वैज्ञानिक रीति से साक्ष्य जुटाने में भी लापरवाही की जाती थी लेकिन, अब चोरी जैसे मामलों में भी फोरेंसिक टीम को बुलाने की अनिवार्यता ने विवेचना को कोर्ट के सामने और मजबूत बना दिया। खास तौर से चोरी समेत महिला अपराधों में फोरेंसिक साक्ष्य अहम सुबूत बन रहे हैं। विवेचना करने वाले दरोगाओं को भी इसकी विशेष ट्रेनिंग दी गई है। एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति का कहना है कि विवेचना में डिजिटल साक्ष्य भी शामिल किए जाने से कोर्ट में मजबूती मिलती है। इससे चार्जशीट के मुताबिक सजा कराने में भी मदद मिल रही है।
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छह माह में मिली सजा, प्रदेश का दूसरा फैसला
14 अगस्त 2024 को सदर बाजार थाना क्षेत्र में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी राजू खंगार के खिलाफ बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। घायल अवस्था में बच्ची खेत में मिली थी। फोरेंसिक टीम के जुटाए अहम साक्ष्य के साथ मामले की चार्जशीट दाखिल हुई। एफएसएल की रिपोर्ट की मदद से कोर्ट ने छह माह के भीतर सजा सुनाई। बीएनएस के तहत दर्ज मामले में जल्दी फैसला सुनाए जाने वाला यह प्रदेश का दूसरा फैसला था।

सजा दिलाने में डिजिटल साक्ष्य साबित हुआ अहम
नवाबाद के वीमार्ट के पीछे रहने वाले चंदन सेन के खिलाफ नवाबाद थाने में वर्ष 2025 में चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने विवेचना करते हुए कई डिजिटल साक्ष्य जमा करते हुए 17 नवंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी। कोर्ट ने एक महीने की सुनवाई के दौरान ही अहम साक्ष्य मिलने की वजह से उसे दोषी ठहराते हुए उसे 7 माह एवं 7 दिन के कारावास से दंडित किया। उसके पर जुर्माना भी लगाया।
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धारा को मुख्य न्याय

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अब तक 42 मामलों में सुनाई जा चुकी सजा
बीएनएस के तहत दर्ज हुए मामलों में अब तक 42 मामलों में न्यायालय की ओर से सजा सुनाई जा चुकी। कई मामले ऐसे भी रहे जिनमें चार्जशीट दाखिल होने के एक माह के भीतर ही कोर्ट ने सजा सुना दी। शासकीय अधिवक्ताओं का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य पुख्ता साक्ष्य के तौर पर कोर्ट के सामने रहते हैं। मजबूत साक्ष्य एवं समय पर गवाही होने की वजह से भी जल्दी फैसले हो रहे हैंं।
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