झांसी। संशोधित कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को ठंडा करने के लिए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में मूंगफली, उड़द आदि फसलों का समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित कर दिया। लेकिन, हकीकत में करीब सवा माह बाद भी अब तक सरकारी खरीद केंद्र नहीं खोले जा सके। इस वजह से न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा। तय एमएसपी से काफी कम कीमत पर किसानों को खुले बाजार में उपज बेचने के लिए मजबूर है। स्थिति यह है कि मूंगफली 5275 रुपये प्रति क्विंटल की जगह करीब 3500 रुपये में बिक रही है।
बुंदेलखंड में मूंगफली, उड़द, तिल की फसल व्यापक पैमाने पर होती है। झांसी में इस दफा उड़द एवं तिल की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। लेकिन, मूंगफली काफी अच्छी हुई है। कृषि विभाग के मुताबिक 119243 हेक्टेयर रकबे में करीब 6802 मैट्रिक टन मूंगफली का उत्पादन हुआ है। केंद्र सरकार ने सिंतबर माह के दूसरे पखवारे में ही 5275 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित कर दिया लेकिन, करीब सवा महीने बाद भी सरकारी खरीद केंद्र नहीं खुले। इस वजह से मजबूरन किसानों को मऊरानीपुर, गुरसराय, चिरगांव, भोजला मंडी में व्यापारियों के हाथ बेचना पड़ रहा। बड़ी संख्या में किसानों के मंडी पहुंचने पर दाम भी लगातार गिर रहा। कुछ दिनों पहले 3800-4000 रुपये प्रति कुंतल की दर से मूंगफली खरीद रहे थे लेकिन, बड़ी तादात में किसानो के पहुंचने से यह रेट भी गिरकर 3200-3500 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया। वहीं, एआर, सहकारिता केपी शुक्ला का कहना है कि शासन स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। वहां से निर्देश जारी होते ही क्रय केंद्र खोल दिए जाएंगे।
पिछली दफा 2546 क्विंटल की हुई थी खरीद
पिछली बार बारिश की वजह से मूंगफली को काफी नुकसान हुआ था लेकिन, इसके बावजूद करीब 2546 क्विंटल मूंगफली की खरीद हुई थी। तमाम रसूखदारों के दबाव की वजह से पिछली बार भी क्रय केंद्र काफी विलंब से खुले थे। पिछली बार पीसीएफ एवं पीसीयू के दो-दो केंद्र खोले गए थे।
रसूखदारों के इशारे पर हो रही देरी
सरकारी खरीद में रसूखदारों का जबर्दस्त दखल रहता है। इस वजह से जानबूझकर सरकारी क्रय केंद्र खोलने में विलंब होता है। जानकारों का कहना है कि समय पर क्रय केंद्र न खुलने से किसान मजबूरी में खुले बाजार में उपज बेंच देता है। किसानों से खुले बाजार में उपज खरीदकर यही रसूखदार बाद में इसे सरकारी खरीद केंद्र में मोटे मुनाफा लेकर खपा देते हैं। हर साल करोड़ों रुपये का इसमें खेल हो जाता है।