फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मूंगफली बेचने के दस दिन बाद भी किसानों को नहीं मिला पैसा

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। मूंगफली खरीद के लिए खोले गए सरकारी क्रय केंद्रों में उपज बेचने के दस दिन बाद भी किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंच सका जबकि सरकार की ओर से 72 घंटे में भुगतान किए जाने का भरोसा दिलाया गया था।
विज्ञापन

बुंदेलखंड में इस दफा मूंगफली की अच्छी फसल हुई है। फसल की सरकारी खरीद के लिए यहां पीसीयू ने मगरवारा में एक, भोजला में दो एवं एरच में एक केंद्र खोले गए जबकि पीसीएफ की ओर से रामनगर एवं भसनेह में एक-एक केंद्र खुले। एरच केंद्र को छोड़कर सभी केंद्रों में खरीद करीब एक दिसंबर से आरंभ हो गई। इस बीच कुल 479 किसानों से कुल 851 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद हो चुकी लेकिन, अभी तक इन किसानों के खाते में पैसा ही नहीं पहुंचा जबकि सरकार की ओर से 72 घंटे के भीतर भुगतान कराए जाने का दावा किया गया था।
भुगतान न मिलने से किसान काफी परेशान हैं। भोजला में मूंगफली बेचने वाले रामकिशुन पाल, अवधबिहारी, बृजकिशोर जाखौन, रामपाल अहिरवार, कन्हैया रायकवार आदि का कहना है उन्होंने पांच दिन पहले मूंगफली केंद्र में बेची। उनको तीन दिन के भीतर भुगतान देने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन, कई चक्कर लगाने के बाजवूद अभी तक पैसा हाथ में नहीं आया। इन किसानों का कहना है कि सरकारी मंडी में बेचने के लिए उपज अपने पास रखे रहे। अब पैसे के लिए भटकना पड़ रहा। एआर, सहकारिता केपी शुक्ला के मुताबिक अभी व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। जल्द ही प्रक्रिया सुचारू हो जाएगी।
विज्ञापन

किसानों के हाथ से फसल जाने के बाद खुले खरीद केंद्र
काफी अरसे बाद इस दफा झांसी जनपद में मूंगफली का बंपर उत्पादन हुआ। करीब सितबंर महीने तक उपज किसानों के पास आ गई। केंद्र सरकार ने मूंगफली का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5275 रुपये कर दिया लेकिन, सरकारी क्रय केंद्र उस समय तक नहीं खुले। नकदी के लिए मजबूरी में किसानों को आढ़तियों के हाथ 3200 रुपये तक में बेचने को मजबूर होना पड़ा। उस दौरान बड़ी संख्या में बिचौलियों ने मूंगफली खरीद कर ली। दिसंबर महीने में बहुत कम किसानों के पास ही उपज बची है, ऐसे में छह क्रय केंद्र खोले गए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही कि बिचौलिए ही सरकारी खरीद का फायदा उठाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें