बालू की कमी के कारण रुके विकास कार्य अब जल्द ही गति पकड़ेंगे। खनिज विभाग ने जिले के 16 घाटों पर छह माह बालू का खनन करने का पट्टा ई-टेंडर के तहत आवंटित कर दिया है। वन विभाग की आपत्ति के चलते नौ घाटों के पट्टे नहीं हो सके हैं।
प्रदेश में बालू के अवैध खनन पर सख्ती से लगी रोक के बाद आपूर्ति ठप पड़ गई थी। हाईकोर्ट ने पहले ही अवैध खनन की शिकायतों पर बालू के पट्टों पर रोक लगा दी थी। बालू न आने के कारण तमाम विकास कार्य प्रभावित हो गए थे। सीपरी बाजार ओवरब्रिज सहित तमाम विकास कार्य बंद हो गए हैं। बालू पर रोक के कारण इसकी कीमतों में भी भारी वृद्धि हो गई है। पुराना स्टॉक रखे लोग या गुपचुप तरीके से खनन करके लाने वाले मनमाफिक दामों में बालू बेच रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए हाईकोर्ट ने ही नई खनिज नीति के तहत छह माह के लिए खनन पट्टे आवंटन की इजाजत दे दी है। जिले में 25 घाटों को बालू खनन के लिए चुना गया है, लेकिन नौ घाटों पर वन विभाग की आपत्ति के कारण वहां पट्टा आवंटित नहीं हो सका। इस वजह से खनिज विभाग ने 16 घाटों से बालू खनन करने का पट्टा ई-टेंडर द्वारा आवंटित कर दिया है।
इन घाटों से निकलेगी इतनी बालू
सेंकर घाट से 16184 घन मीटर, बघौरा से 30345, गंगावली से 10115, खिरियापाली से 9103, बरगढ़ से 8557, ढिकौली से 40460, कुडरी से 80920, एरच से 40460, ठर्रो से 17195, खकौरा से 40460, धवाकर से 12138, पचौरो से 20230, लुहरगांव से 80920, शमशेरपुरा से 60690, चेलरा से 40460, परेछा से 40460 घन मीटर बालू निकलेगी।
आठ हजार से तीस हजार पहुंचे हैं दाम
बालू खनन पर रोक के बाद बालू के दामों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई। कुछ महीने पहले जो पांच सौ फीट बालू का दाम आठ हजार रुपये था। वह बढ़कर 25 से तीस हजार रुपये तक पहुंच गया था। दामों में तेजी के चलते लोगों ने बालू के विकल्प के तौर पर डस्ट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, लेकिन डस्ट से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है। बालू व्यापारी जीतू यादव बताते हैं कि बालू खनन के पट्टे आवंटित होने के बाद इनके दामों में कमी आने के साथ ही विकास कार्य रफ्तार पकड़ सकेंगे।