अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में अक्सर गंभीर रोगियों का इलाज शुरू होने में काफी समय लग जाता है। जिसकी वजह सर्जरी, हड्डी व मेडिसिन के डॉक्टर द्वारा रोगी को एक-दूसरे का बताकर टरकाना होता है। इन्हीं हालात की वजह से आएदिन विवाद होते हैं। इस समस्या का निदान करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने कंसल्टेंट की मॉनीटरिंग के लिए ड्यूटी लगाने के आदेश दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में गंभीर रोगी को लेकर आने वाले इमरजेंसी में अक्सर तीमारदारों को गंभीर रोगी का पर्चा बनवाकर उपचार शुरू कराने के लिए कभी सर्जरी तो कभी हड्डी रोग के डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। दोनों डॉक्टर अपना-अपना तर्क देकर टरकाते रहते हैं। जिससे तीमारदार आक्रोशित हो जाते हैं और विवाद की स्थिति बन जाती है। पिछली घटनाओं पर मंथन के बाद कॉलेज प्रशासन तय किया है कि अब इमरजेंसी में चारों विभागाध्यक्ष कंसल्टेंट से मॉनीटरिंग कराएंगे। ऐसा कतई नहीं होगा कि गंभीर रोगी का उपचार शुरू होने में देरी हो। यदि किसी डॉक्टर को भ्रम है, तो वह सीधे कंसल्टेंट से संपर्क करके समस्या का निदान करेगा। इससे रोगी को उपचार मिलने में देरी नहीं होगी। सीएमएस डाॅ. सचिन माहुर का कहना है कि इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगी के उपचार में देरी नहीं हो, इसलिए चारों विभागों के कंसल्टेंट को मॉनीटरिंग पर लगाने के लिए कहा गया है।