अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ठंड में सांस रोगियों का दम फूल रहा है। हालात ज्यादा बिगड़ने पर मरीज का ऑक्सीजन लेवल 65 फीसदी तक पहुंच जा रहा है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना 17 से 20 मरीज भर्ती हो रहे हैं। ओपीडी में भी श्वांस रोगियों की संख्या काफी बढ़ गई है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं टीबी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि ठंड के मौसम में लगभग 60 फीसदी अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस एलर्जी रोगियों को सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं। इन मरीजों का पहले से ही श्वसन मार्ग कमजोर होता है। वहीं, ठंडी हवाएं, कोहरे, रेस्पिरेटरी वायरस, नमी, प्रदूषण के संपर्क में आते ही इन मरीजों को अटैक पड़ता है।
सांस की नालियों में सूजन बढ़ जाती है। सांस की नालियां संकुचित हो जाती हैं। गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। तब इन्हें अस्पताल में भर्ती करानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 12 मरीजों को भी ऑक्सीजन लेवल गिरने पर भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि ठंड में ऑक्सीजन लेवल गिरने पर रोज सात से आठ मरीज भर्ती हो रहे हैं। ओपीडी में दिखाने आने वाले सांस के मरीजों की संख्या भी 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
ठंड में सांस के मरीजों में दिखते हैं ये लक्षण
- सांस फूलना
- सीने में जकड़न
- खांसी, बलगम
- गले में दर्द
- नाक का बहाना बंद होना
- छाती से सीटी की आवाज आना