पांच साल बाद पलींदा और मथुरापुरा ग्राम संभा को प्रधान मिलेंगे।
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पांच साल बाद पलींदा और मथुरापुरा को मिलेंगे ग्राम प्रधान
झांसी। पांच साल बाद पलींदा और मथुरापुरा ग्राम सभा की जनता को ग्राम प्रधान मिलेंगे। इस बार के पंचायत चुनाव में इन दोनों सीटों के आरक्षण में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जबकि, अब तक ये सीटें अनुसूचित जनजाति के खाते में थीं।
2015 के पंचायत चुनाव में बबीना विकास खंड की पलींदा और मथुरापुरा ग्राम सभा अनुसूचित जनजाति के खाते में थी। जबकि, यहां कोई इस वर्ग का मतदाता भी नहीं था। ऐसे में चुनाव के दरम्यान यहां ग्राम प्रधान नहीं चुना जा सका था। इसके बाद भी कई बार उप चुनाव की प्रक्रिया अमल में लाई गई, लेकिन हालात में बदलाव नहीं हुआ। इन दोनों सीटों की गतिविधियों का संचालन प्रशासक के भरोसे रहा। लेकिन, इस बार इन सीटों का आरक्षण बदला जा रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव में उक्त दोनों ग्राम सभाओं को प्रधान मिल जाएंगे। विदित हो कि 2010 के पंचायत चुनाव में बबीना की रसीना सीट एसटी वर्ग के खाते मेें थी। ये ग्राम सभा भी पांच साल बगैर ग्राम प्रधान के ही रही थी।