झांसी। अमर उजाला फेसबुक लाइव कार्यक्रम के क्रम में मंगलवार को जल संकट के कारण और निवारण पर चर्चा हुई। लोगों से ऑनलाइन चर्चा करते हुए वर्ल्ड वाटर काउंसलिंग के सदस्य डॉ. संजय सिंह ने कहा कि पानी के मामले में बुंदेलखंड का समृद्ध इतिहास रहा है। लेकिन, अनदेखी के चलते ये इलाका संकट ग्रस्त हो गया है। इस दौरान उन्होंने मेसेज बॉक्स में आने वाले लोगों के सवालों का जवाब भी दिया।
कार्यक्रम में संजय सिंह ने कहा कि चंदेलकाल में बुंदेलखंड में तालाबों की श्रृंखला के जरिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। हमारी इस विरासत को देखकर अंग्रेजों ने भी सराहा। जल संकट को दूर करने के लिए आज अपनी विरासत को सहेजने और पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था परमार्थ पिछले पच्चीस सालों से इस दिशा में काम कर रही है।
लोगों के सवालों के दिए जवाब -
- हमीरपुर के सतीश चंद्र ने पूछा कि गांवों के तालाब घरों का गंदा पानी जाने से गंदे हो गए हैं। स्वच्छ कैसे करें? इस पर डा. संजय सिंह ने कहा कि नालियां बनाकर गंदा पानी तालाबों में जाने से रोका जा सकता है।
- सागर (मप्र) से पारस प्रताप सिंह ने कहा कि सागर के बंडा और शाहगढ़ में जल संकट के निवारण के लिए क्या किया जाए? डॉ. सिंह ने कहा कि वर्षा जल का अधिक से अधिक संचयन किया जाए।
- ललितपुर के रमेश चंद्र जैन ने मड़ावरा में जीर्ण - शीर्ण अवस्था में पड़े कुओं के संरक्षण के उपाय पूछे, इस पर डा. सिंह ने ग्रामीण इलाकों में जल पंचायत बनाकर कुओं के संरक्षण की सलाह दी।
- ललितपुर के ही पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि तालाबों पर अतिक्रमण कैसे हटाया जाए, डॉ. सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सहयोग से ही अतिक्रमण हट सकता है।
- अर्चना अग्रवाल ने कहा कि तालाबों को पुनर्जीवित करने में प्रशासन का सहयोग कैसे मिलेगा, इस पर डॉ. संजय सिंह ने कहा कि इस दिशा में परमार्थ संस्था लगातार काम कर रही है। हम सहयोग को तैयार हैं।
- झांसी के महावीर शरण भार्गव ने खेत तालाब की उपयोगिता पूछी, डॉ. सिंह ने इसे बेहद सरल और सुगम जरिया बताया।
- जालौन के सत्येंद्र कुमार ने शहरी क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर बढ़ाने के तरीके पूछे। इसके लिए डॉ. संजय सिंह ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सबसे उपयोगी बताया।