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महज तीन पुलिसकर्मी, कैसे सुलझें 262 साइबर मामले

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only three policeman, how to solve cyber crime 262 case
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झांसी। जिले में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा है, लेकिन साइबर सेल आज भी अपराधियों से पीछे है। मात्र दो कंप्यूटर व तीन पुलिसकर्मियाें के सहारे सेल साइबर अपराधियों को पकड़ने में हांफ रहा है।
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यही हाल विवेचनाओें का भी है। पुलिसकर्मियों की संख्या व सुविधाएं कम होने के कारण अपराधियों की मौज हो रही है। इसके पीछे पुलिस में साइबर विशेषज्ञों की कमी भी आड़े आ रही है।
जिले में लगातार हो रहे साइबर अपराध की गुत्थी सुलझाने में पुलिस की कमजोरी के पीछे मजबूत टीम न होना प्रमुख कारण माना जा रहा है। थानों पर साइबर एक्सपर्ट नहीं है। ऐसे में अधिकतर मामले थाने से साइबर सेल में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। साइबर सेल की जांच में काफी समय लग रहा है। मात्र दो कंप्यूटर व तीन पुलिसकर्मियों के सहारे गिरेवां तक पहुंचने की जद्दोजहद चल रही है। वर्तमान में करीब 262 से अधिक मामले अब भी लंबित हैं। पुलिस के साइबर सेल में एक प्रभारी और दो सिपाही हैं। यहां पर साइबर मामलों के विशेषज्ञ भी नहीं है। यही वजह है कि शातिर अपराधी लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं और पुलिस उन तक पहुंच ही नहीं पा रही है।
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ये हैं प्रमुख घटनाएं
- एटीएम का पासवर्ड पूछकर बैंक अकाउंट से रुपये निकाल लेना।
- फर्जी ईमेल आईडी बनाकर किसी के नाम का भी दुरुपयोग करना।
- फेसबुक अकाउंट पर छेड़छाड़, अश्लील फोटो व वीडियो अपलोड करना।
- ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये ठगी करके ग्राहकों को चूना लगाना।
- सोशल मीडिया में तस्वीर वायरल कर ब्लैकमेल करना व धमकी देना।
इन धाराओं में होता केस
हैकिंग, डेटा चोरी समेत कई ऐसे मामलों में आईटी एक्ट के सेक्शन 66 और सेक्शन 43 के तहत केस दर्ज होता है, जबकि क्रेडिट व डेबिट की चोरी, क्लोनिंग, मोबाइल सिम कार्ड फर्जीवाड़ा और इससे जुड़े मामलों में आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज किया जाता है। इन मामलों में आईपीसी के सेक्शन 463 और सेक्शन 471 में केस दर्ज किया जाता है।
कार्यशाला के जरिये नई तकनीकों की जानकारी पुलिसकर्मियों को दिलाई जा रही हैं। साइबर मामलों के निस्तारण के लिए स्पेशल टीम भी लगाई गई है। साथ ही, थानों पर जरूरत पड़ने पर उनका भी सहयोग लिया जा रहा है। इसी बीच कई बड़ी सफलताएं भी सेल की मदद से मिली हैं।
राहुल मिठास, अपर पुलिस अधीक्षक
यह हैं मुख्य मामले
केस नंबर 1
17 सितंबर को थाना कोतवाली के आंतिया तालाब के पास रहने वाले अमन नामदेव के ऑनलाइन कंपनी से खरीदारी के दौरान खाते से 1 लाख 64 हजार रुपये निकाल गए। पुलिस व साइबर सेल की जांच अधूरी है।
केस नंबर 2
26 सितंबर 2018 को कोतवाली के छनियापुरा मोहल्ला निवासी डिप्टी सीटीआई विक्की अहिरवार एटीएम बदलवाने की कहकर खाते की जानकारी लेकर 49 हजार रुपये निकल गए। मामला दर्ज करने तक ही पुलिस सीमित रही।
केस नंबर 3
3 जनवरी को थाना बबीना के भेल स्थित तिलकनगर निवासी प्रभुनाथ राय के खाते से पेटीएम से केवाईसी करने के नाम पर चार लाख रुपये निकल गए। अब तक पुलिस व साइबर सेल कुछ पता नहीं लगा सकी।
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