झांसी। ज्यों-ज्यों मतदान की तिथि नजदीक आ रही है प्रचार तो जोर पकड़ ही रहा है, चौपाल और दुकानों पर भी चुनावी चर्चाएं तेज हो गईं हैं। शनिवार को शाम करीब चार बजे झांसी सदर विधानसभा के सिंगर्रा गांव में यादव मिष्ठान भंडार पर बैठे कुछ लोग चुनावी चर्चा में मशगूल थे। ठेठ बुंदेली अंदाज में चुनाव पर चर्चा जारी थी। दुकान पर बैठे ग्रामीण माधौ यादव ने कहा, ईबैर जात बिरादरी पै वोट नई दैंने, हम तो ओईखौं वोट दैहैं जीने हमें रैवै के लाने छायरो दओ। पैलां के चुनाव में नेता बातें तो बड़ी-बड़ी धमक जातते पै रैवे के लाने घर काऊंने नई दओ।
चुनावी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सुरेंद्र राय ने कहा ...महंगाई तो झेल लै हैं, पै पैले की सरकार में आदमी गुंडन के मारे सुक से नहीं रै पाए, बउइएं बिटियां संजाकैं घर से बायरे नई कड़ पाउततीं, जा राज में जो तो सुबीतो हो गऔ कि सबरे गुंडा दुके बैठे। इसी तरह बबीना विधानसभा क्षेत्र के डोमागोर गांव में दोपहर के समय एक परचून की दुकान पर बैठे ग्रामीणों के बीच चुनाव को लेकर चर्चा जारी थी। इस चर्चा में यह बात सामने आई कि अन्ना जानवरों से परेशान किसानों का सभी दलों से मोहभंग हो गया है। दुकान पर बैठे शिवाजी परमार ने चुनावी चर्चा को बीच में ही काटते हुए कहा, ..खेतन में ढोर बछेऊ देखैं कै चुनाव, चौपिन के मारे फसल बचावो मुश्किल पर रई। दुफइया में घरे रोटी खावे आएते सो घर के एक जनन को खेत पै रखनवाई खौं छोड़कैं आए हैं। नेता तो वोट लैंके अपने घरे चले जैहैं, फसल को चौपट्टा हो गओ तो हम साल भर का खैहैं। किसान विकास राजपूत ने बात को जारी रखते हुए कहा गऊशाला तो खूब बन गई पै, ढोरन को इंतजाम नई हो पा रओ, झुंड के झुंड खेतन में घुसकैं संपटसौरा कर रए। रामकिशन ने सरकार के पांच साल के रिपोर्ट कार्ड के अंक देने के अंदाज में कहा, खाद के लाने जरूर हैरान भय, पै पूरे पांच सालन में गुंडा बिलकुल पूंछ नई हला पाए।