झांसी। हुकूमत ने झांसी वालों को मेट्रो के सफर का ऐसा ख्वाब दिखाया कि अभी तक ख्वाब ही है। लखनऊ से अधिकारी झांसी में मेट्रो के लिए दावे तो रोज कर रहे हैं लेकिन यह प्रोजेक्ट झांसी में कहीं दिख नहीं रहा। यहां तक कि स्थानीय स्तर पर अफसरों को कोई जानकारी भी नहीं है। न तो फिजिबिलिटी टेस्ट हुआ है और न ही कोई डीपीआर बनी। जबकि शासन स्तर से इन दोनों कामों के किए 150 करोड़ मंजूर किया गया है। यह पैसा भी कहां है किस विभाग को दिया गया है इसकी जानकारी भी किसी के पास नहीं।
महानगर में सार्वजनिक परिवहन को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने सबसे पहले वर्ष 2017 में झांसी समेत प्रयागराज, कानपुर, आगरा में मेट्रो ट्रेन चलाने का एलान किया था। झांसी में पूरे दो साल तक परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। लखनऊ में बैठे आला अफसरों ने उस दौरान इसकी कोई सुध नहीं ली। इसके बाद वर्ष 2019 में फिर सरकार ने कहा कि झांसी में मेट्रो चलाई जाएगी। रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान भी कर दिया। झांसी में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) एवं फिजिबिलिटी टेस्ट (भौतिक परीक्षण) के लिए 150 करोड़ रुपये भी आवंटित हो गए। बजट तय होने के बाद कुछ समय तक अफसरों ने फिर मेट्रो दौड़ने का ख्वाब दिखाया लेकिन, उसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद से अभी तक इस प्रोजेक्ट की आगे बढ़ाने में किसी महकमे ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इस प्रोजेक्ट को कौन बनाएगा। डीपीआर कौन तैयार करेगा। कहां से कहां तक बनेगी। किसी को कुछ नहीं पता।
तीन साल से गुम हैं डेढ़ सौ करोड़
सरकार ने वर्ष 2019 में झांसी में डीपीआर आदि के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया लेकिन, बजट में आवंटित यह रकम कहां गई, इसका पता किसी महकमे को नहीं है। नगर निगम एवं प्राधिकरण के अफसर भी इस बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं लेकिन, अफसरों का कहना है कि यह पैसा अभी तक झांसी के किसी महकमे के पास नहीं पहुंचा है।
मेट्रो के बजाए अब लाइट मेट्रो का दांव
पांच साल तक मेट्रो ट्रेन चलाने का ख्वाब दिखाने के बाद अब अफसरों ने झांसी में लाइट मेट्रो चलाने की बात कही है। पिछले महीने सरकार ने झांसी में लाइट मेट्रो चलाने की बात कही। अभियंताओं का कहना है लाइट मेट्रो की लागत मेट्रो ट्रेन से कम होती है। अमूमन 10 लाख से कम आबादी वाले इलाकों में अब लाइट मेट्रो को तरजीह दी जाती है लेकिन, इसका रखरखाव समान्य मेट्रो की तरह ही महंगा है। अमूमन मेट्रो ट्रेन को बिछाने में प्रति किमी करीब बीस करोड़ की लागत आती है जबकि लाइट मेट्रो में 12 करोड़ प्रति किमी की लागत आती है।
सरकार ने मोबेलिटी प्लान के तहत एक विस्तृत डीपीआर बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत राइटस कंपनी के माध्यम से इसे तैयार कराया जा रहा है। इसके जरिए लाइट मेट्रो के लिए भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
सर्वेश दीक्षित, उपाध्यक्ष, जेडीए