अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज में लिवर रोगियों में अधिकांश मरीज फैटी लिवर के आ रहे हैं। इनमें बड़े ही नहीं बुजुर्ग भी हैं। वरिष्ठ डॉक्टरों ने बताया कि सिर्फ शराब नहीं बल्कि चिकनई युक्त खाना, जंक फूड और व्यायाम न करना भी इसके कारण हो सकते हैं। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य होने के कारण लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इलाज में लापरवाही घातक हो सकती है।
यदि पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन रहता है। चलने-फिरने में थकान और त्वचा में खुजली है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ये फैटी लिवर के लक्षण हो सकते हैं। जब स्थिति बिगड़ती है, तो भूख कम लगती है। जी मिचलाता हैं और भ्रम व ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि जब फैटी लिवर ग्रेड तीन-चार पहुंचता है तब लक्षण उबरते हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना तीन-चार रोगी भर्ती हो रहे हैं। उनका कहना है कि जरूरी नहीं कि अत्यधिक शराब पीने से ही फैटी लिवर होता है। जंक फूड, चिकनाई युक्त खाना, खेलकूद व सैर नहीं करने की वजह से लोग फैटी लीवर के शिकार हो रहे हैं।
0- ये कहना है डॉक्टरों का
शुगर रोगियों में फैटी लिवर की ज्यादा संभावना होती है। इसलिए शुगर लेवल कंट्रोल रखना चाहिए। खानपान और अव्यवस्थित दिनचर्या की वजह से बड़े ही नहीं बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं।
डॉ. राम प्रताप सिंह बुंदेला, वरिष्ठ चिकित्सक
फैटी लिवर की अहम वजह जंक व फास्ट फूड का सेवन है। युवाओं की शारीरिक और खेलकूद की गतिविधियां कम हो गई हैं। इसकी वजह से लिवर पर फैट जमा होता जा रहा है और दिक्कत हो रही है।
डॉ. नूतन अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक मेडिकल कॉलेज
0- ये करना चाहिए
प्रारंभिक फैटी लिवर आहार परिवर्तन, वजन घटाने, व्यायाम व शुगर कंट्रोल से सही कर सकते हैं। कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। चिकनई का कम सेवन करें और कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार (सफेद चावल, आलू, सफेद ब्रेड) खाने से बचें।