झांसी। पंचायत चुनाव हुए अभी नौ महीने हुए हैं, लेकिन प्रधानजी शिकायतों में घिर गए हैं। ऐसे एक नहीं 25 ग्राम प्रधानों की शिकायतें आ चुकी हैं। इनकी जांच के लिए जिला पंचायत राज विभाग ने कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी है।
छुट्टा जानवर न केवल आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं, बल्कि ग्राम प्रधानों के लिए भी मुसीबत का कारण बन गए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान को इस उम्मीद से चुना था कि वे गांव का विकास करेंगे। लेकिन, प्रधान गांव के विकास की जगह शिकायतों में घिर गए हैं। ब्लाक बंगरा की एक ग्राम पंचायत से शिकायत आई है कि सामुदायिक गोशाला में 250 गोवंश रखे गए थे, लेकिन उनके लिए चारा और भूसा का कोई इंतजाम नहीं है। आरोप यह भी लगाया गया कि दो माह पहले गोवंश को छुट्टा छोड़ दिया गया, इनसे फसलों के बचाव के लिए किसानों को फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। कमोवेश इसी तरह की शिकायतें अन्य ग्राम प्रधानों की आई हैं।
अब तक ब्लाक मोंठ के चार, बंगरा के छह, मऊरानीपुर के पांच, चिरगांव के तीन, बामौर के पांच, गुरसराय के एक और बड़ागांव के एक ग्राम प्रधान की शिकायत जिला पंचायत राज विभाग में आई है। इनमें से नौ शिकायतें जांच के बाद निरस्त कर दी गईं।
ग्राम प्रधानों को नहीं मिला भुगातान
ब्लाक बंगरा की 12 ग्राम पंचायतों के पूर्व ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर गोशालाओं के रखरखाव का भुगतान कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गायों के भरण पोषण का भुगतान जल्द कराया जाए। इस अवसर पर ग्राम निनौरा, अड़जार, खिसनी बुजुर्ग, खिसनी खुर्द, मगरपुर, घुराट, ढोंड़ा, भिटौरा, बम्हौरी सुहागी, चौकरी और पचौरा गांव के पूर्व प्रधान शामिल रहे।
ग्राम प्रधानों की शिकायतें आई हैं। जांच कमेटी गठित कर मामलों की जांच कराई जा रही है। अब तक नौ शिकायतें आधारहीन पाई गईं। इनको निरस्त कर दिया गया है। जांच पूरी तरह से गोपनीय है, ताकि ग्राम प्रधानों के स्वाभिमान को नुकसान न पहुंचे।
- जगदीश राम गौतम, जिला पंचायत राज अधिकारी