अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल छात्र ललित की मौत से उसके साथियों में दुख के साथ भारी रोष भी है। साथी छात्र उसकी मौत के पीछे सरकारी महकमों की लापरवाही को ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि एमबीबीएस प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के अधिकांश छात्र पैरामेडिकल हॉस्टल में रहते हैं, लेकिन इसके आसपास स्पीड ब्रेकर न स्ट्रीट लाइट है। पूरा इलाका ही अंधेरे में डूबा रहता है। इस वजह से अक्सर यहां हादसे होते हैं।
पैरामेडिकल की ओर जाने वाले रास्ते में अंधा मोड़ पड़ता है। स्पीड ब्रेकर न होने से भारी वाहन तेज रफ्तार में इधर से गुजरते हैं। घटना के दिन भी गढ़मऊ की ओर से ऐसे ही तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्रॉली आई और ललित को अपनी चपेट में ले लिया। उसके साथ चल रहे हरिओम पांडेय, पंकज सिंह एवं अभिषेक चौधरी बाल-बाल बचे।
मेडिकल छात्रों के मुताबिक वह लोग कई बार गति नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनवाने के साथ ही स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग कर चुके, लेकिन आज तक यह नहीं बने। अंधेरा होने से मेडिकल छात्राओं को भी परेशानी होती है। उनका कहना है कि अगर यहां सुरक्षा के उपाय होते तब ऐसे हादसे नहीं होते।
दुखी साथियों ने निकाला कैंडल मार्च -
ललित की मौत से दुखी उसके सहपठियों ने कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान नीरज श्रीवास्तव, अनन्या, ऋषभ पांडेय, विधेश टंडन, यश सक्सेना, मोहित मंगल, अमोघ श्रीवास्तव, वामिका गुप्ता समेत अन्य सभी बैच के मेडिकल छात्र शामिल रहे।