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नए साल के राजा और मंत्री होंगे मंगल

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झांसी। नव संवत्सर 2078 मंगलवार से शुरू हो जाएगा। हिंदू कैलेंडर के पहले महीने चैत्र में मां दुर्गा की भक्ति के साथ ही विभिन्न धार्मिक एवं मांगलिक कार्य होंगे। वहीं, आज सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। लोग अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए दान पुण्य करेंगे।
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सनातन धर्म में विक्रम संवत कैलेंडर का बड़ा महत्व है। कैलेंडर व संबंधित पंचांग के आधार पर शुभ कार्य के लिए मुहूर्त व तिथि ज्योतिष एवं धार्मिक विद्वानों द्वारा तय की जाती है। वर्तमान में आनंद संवत्सर 2077 चल रहा है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार नव संवत्सर का नाम इस बार राक्षस होगा। जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार नव संवत्सर का राजा और मंत्री दोनों ही इस बार मंगल होंगे। क्योंकि, नया साल का प्रारंभ मंगलवार से होगा और ब्रियांश योग के कारण राजा और मंत्री दोनों ही मंगल होंगे। उनके अनुसार नए साल में भी महामारी का प्रभाव रहेगा। वहीं, चंद्रमा मेष राशि में होगा। नए साल की मध्य रात्रि 2 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र का उदय 18 अप्रैल को होगा। उनके अनुसार आज सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। लोग जलाशयों में स्नान कर अपने पूर्वजों को याद करते हुए दान पुण्य करेंगे।
घर-घर होगी भगवान झूलेलाल की पूजा
झांसी। नव संवत्सर की प्रतिपदा पर मंगलवार को भगवान झूलेलाल की जयंती सिंधी समाज के सदस्य पूरे उत्साह एवं भक्ति से मनाएंगे। सभी श्रद्धालु अपने-अपने घरों में पूजा करेंगे। पूज्य सिंधी पंचायत झांसी शहर के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैनवानी ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण इस बार सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे और न ही शोभायात्रा निकाली जाएगी। पूज्य सिंधी पंचायत भवन में ज्योति प्रज्ज्वलित कर आरती व अरदास के बाद ओरछा की पवित्र वा नदी में विसर्जित की जाएगी।
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गुड़ी पड़वा पर छतों पर लगेंगे ब्रह्म ध्वज
नव संवत्सर के पहले दिन महाराष्ट्रीय समाज पूरे उत्साह से गुड़ी पड़वा का पर्व मनाएंगे। घरों और मंदिरों में ब्रह्म ध्वज फहराकर नए साल की एकदूसरे को शुभकामनाएं देंगे। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर के अनुसार गुड़ी पड़वा पर पंचांग की भी पूजा करेंगे। गणेश मंदिर में सुबह 11 बजे से भगवान सत्यनारायण की कथा होगी। इससे पहले मंदिर में ब्रह्म ध्वज लगाएंगे। कोरोना से बचाव के कारण सीमित संख्या में श्रद्धालु रहेंगे।
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