चैत्र की नवरात्र और नव वर्ष विक्रम संवत 2077 का बुधवार से शुभारंभ होगा। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की मंदिरों में पुजारी तथा घरों में श्रद्धालु पूजन करेंगे। कोरोना वायरस के कारण इस बार देवी मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। पंचकुइयां मेला भी नहीं लगेगा। घट स्थापना सुबह शुभ मुहूर्त में श्रद्धालु करेंगे। कोरोना के खात्मे के लिए भक्त घर पर रहकर ही मां भगवती से विशेष प्रार्थना करेंगे।
सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्व है। सभी श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करेंगे। मंदिरों व घरों में सुबह व शाम को मां दुर्गा की आरती व अनुष्ठान कार्य होंगे।
पंचकुइयां मंदिर, लक्ष्मी गेट स्थित महाकाली मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, कैमासन मंदिर, मैमासन मंदिर, लहर की देवी माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पुजारी द्वारा अभिषेक, श्रृंगार व पूजन कार्य होगा। लेकिन यह मंदिर कोरोना वायरस के कारण इस बार श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले जाएंगे। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार नवरात्र पर महामृत्युंजय मंत्र और श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ सभी लोग अवश्य करें। इससे महामारी के प्रकोप से रक्षा होगी।
ऐसे करें मां की पूजा
नवरात्र पूजा में लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछायें। मिट्टी अथवा तांबे के कलश को कलावा बांध कर रखें। वेदी पर जौ व गेंहू, अशोक व आम के पत्ते भी रखें। इसके बाद चौकी पर गणेश जी, मां दुर्गा, नौ ग्रह को विराजमान करें। माता रानी का वेद मंत्रों का उच्चारण कर षोडशोपचार पूजन करें। अखंड दीप प्रज्ज्वलित के बाद श्री दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
माता रानी के दर्शन करें ऑनलाइन
महानगर के मंदिरों ने भक्तों के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था करायी है। फेसबुक व व्हाट्सएप पर श्रद्धालुु हर समय की आरती व पूजा को देख कर मां जगदंबा के दर्शन कर सकते हैं। सिद्धेश्वर मंदिर के धर्माचार्य हरीओम पाठक ने बताया कि मां पीतांबरा व मंदिर में विराजमान देवियों के ऑनलाइन श्रद्धालुओं को कराए जाएंगे।
आरती का लाइव प्रसारण कराया जाएगा। मंदिर में आरती सुबह 7:30 बजे और शाम 6 बजे से होगी। घट स्थापना भी सुबह होगी। इधर, महाकाली मंदिर से भी माता रानी के ऑनलाइन दर्शन श्रद्धालुओं को कराए जाएंगे।