झांसी। इस बार पितृ पक्ष एक सितंबर से है। हालांकि कुछ पंचांगों के अनुसार यह दो सितंबर से शुरू हो रहा है। इसके एक माह बाद शारदीय नवरात्र शुरू होंगे। यह संयोग 19 वर्ष के बाद बन रहा है। पितृपक्ष के अगले दिन मलमास प्रारंभ हो जाएगा, जिसे पुरुषोत्तम का महीना भी कहते हैं।
सनातन धर्म में पितृपक्ष और शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए श्राद्ध कार्य करते हैं। जबकि शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अनुष्ठान करते हैं। हर वर्ष पितृ पक्ष की अमावस्या के ठीक अगले दिन बाद अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र प्रारंभ होते हैं। लेकिन इस बार पंचांग में दो अश्विन मास होने से शारदीय नवरात्र 17 अक्तूबर से शुरू होंगे।
ज्योतिषविद डॉ. नाथूराम पांडे के अनुसार वर्ष 2001 में पितृपक्ष 2 सितंबर से 17 सितंबर तक पडा था। 18 सितंबर से मलमास शुरू हुआ था और इसके बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हुए थे। उनके अनुसार पितृपक्ष इस बार 1 सितंबर से शुरू होंगे। पूर्णिमा की तिथि सुबह 9:30 बजे के बाद से लग जाएगी। आचार्य शांतनु पांडे ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार एक तारीख से पितृ पक्ष शुरू होगा। इधर, धर्माचार्य हरिओम पाठक ने बताया कि काशी के पंचांगो में 2 सितंबर से पितृपक्ष प्रारंभ है।
मलमास का है विशेष धार्मिक महत्व
मलमास को पुरुषोत्तम का महीना भी कहा जाता है। ज्योतिषविद शिवकेश दुबे के अनुसार भगवान श्री हरि ने मलमास को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया था। एक अतिरिक्त मास होने के कारण इसे अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है। पुरुषोत्तम के महीने में भागवत कथा सुनने का बड़ा महत्व है। मंदिरों में दान पुण्य किया जाता है। मलमास में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।