झांसी। नगर निगम प्रशासन की बेपरवाही से उसकी करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन हाथ से निकल चुकी है। इन पर जगह-जगह अवैध कब्जे किए जा चुके। अफसरों की बेपरवाही से दूसरी जगह भी कब्जे होते जा रहे। करीब 20 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे चिह्नित भी किए जा चुके है। लेकिन कब्जा धारकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।
नगर महापालिका से नगर निगम में तब्दील होने के बाद निगम के स्वामित्व में ग्राम समाज समेत सीलिंग की सरप्लस जमीन भी मर्ज हो गई लेकिन, इनकी पैमाइश नहीं कराई गई। निगम अफसर इस जमीन को भुलाए बैठे रहे। इसका फायदा उठाते हुए रसूखदारों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया। सबसे अधिक कब्जे लहरगिर्द इलाके में हुए। यहां गाटा संख्या 170, 568, 668 आदि नगर निगम का बताया जा रहा लेकिन, मौके पर दूसरे लोगों का कब्जा है। यहां करीब चार एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है। इसी तरह खालसा स्कूल के पास सिद्घबाबा पहाड़िया में आसपास करीब 15 एकड़ जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। यहां कुछ लोगों ने घेरे बना लिए हैं जबकि खाली जगह पर मकान बना लिए गए। इस जमीन पर इसी तरह झांसी खास में पंचवटी कॉलोनी के पास गाटा संख्या 816 में भी नगर निगम की काफी जमीन है, जिस पर लोगों ने कब्जा जमाया हुआ है। इसी तरह लक्ष्मी ताल के पास स्थित पहाड़िया पर भी सार्वजनिक स्थान पर दुकानें बना ली गईं। वहीं, इसे खाली कराने की कोशिश की जा रही है लेकिन, इस पर अवैध कब्जे जमा लिए जाते हैं। हालांकि अपर नगर आयुक्त शादाब असलम का कहना है कि अवैध कब्जों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। हाल में कई जमीन खाली कराई गई। आगे भी अभियान चलाया जाएगा।
पार्षद भी नहीं रहे पीछे
नगर निगम की जमीन पर कुछ निवर्तमान एवं पूर्व पार्षदों ने भी कब्जे जमा रखे हैं। इनके नाम देखकर भी निगम प्रशासन खामोशी की चादर ओढ़ लेता है। निगम सूत्रों का कहना है जमीन कब्जाने के मामले में सत्तारूढ़ दल समेत विपक्षी पार्षद भी पीछे नहीं हैं।
लगवाए जाने थे तार के बाड़
निगम संपत्तियों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए उनको तार से घिरवाने एवं नामपट्ट लगवाने का प्रस्ताव निगम सदन ने कई बार पारित किया। लेकिन आज तक सभी संपत्तियों को तार के बाड़े से नहीं घेरा जा सका है। कुछ जगहों पर नामपट्ट लगाकर छोड़ दिया गया। इस नाम पट्ट को भी कब्जा करने वालों ने तोड़ दिया है।
सैकड़ों की संख्या में शिकायतें
नगर निगम में गंदगी के बाद दूसरी सबसे अधिक शिकायतें अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण के तौर पर ही दर्ज कराई गई हैं। निगम के हेल्प डेस्क पर हर महीने पचास से अधिक शिकायतें पहुंचती हैं। इसी तरह आईजीआरएस पोर्टल पर इससे संबंधित शिकायतें आती हैं लेकिन, यह शिकायतें भी समय पर नहीं निपटती हैं।