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‘आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया’ कैसे सुधरेगा नगर निगम का ढर्रा भैया

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झांसी। नगर निगम का पुनरीक्षित बजट कार्यकारिणी ने मामूली संशोधनों के साथ पारित कर दिया। पुनरीक्षित बजट में बताया गया कि नगर निगम की कुल आय 214.01 करोड़ रहेगी जबकि उसे 322.95 करोड़ खर्च करने होंगे। खर्च की भरपाई तमाम कटौती करने के साथ ही पिछले वर्ष के एरियर से पूरी की जाएगी। साथ ही, आय कम होने का खामियाजा शहरवासियों को विकास कार्यों और जनसुविधाओं में कटौती के रूप में भुगतना पड़ेगा। निर्माण कार्यों में भी कटौती की गई है जबकि पेट्रोल-डीजल के खर्च में बढ़ोत्तरी की गई है। बैठक के दौरान कार्यक़ारिणी सदस्यों ने ध्वस्त सफाई व्यवस्था, जमीन पर अवैध कब्जे, निर्माण कार्यो में अनियमिताएं आदि को लेकर अफसरों की जमकर खिंचाई की।
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महापौर रामतीर्थ सिंघल की अध्यक्षता में बैठक आरंभ हुई। पार्षदों ने ध्वस्त सफाई व्यवस्था को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। पार्षदों ने कहा सफाई व्यवस्था लगातार ध्वस्त होती जा रही है। पार्षद किशोरी रायकवार, विकास खत्री, महेश गौतम, दिनेश सिंह दीपू, विमल किशोर, मुकेश सोनी बंटी, प्रदीप नगरिया आदि ने स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। पार्षदों के निशाने पर सबसे अधिक क्षेत्रीय सफाई निरीक्षक रहे। पार्षदों ने ओडीएफ को लेकर भी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। सरकारी वाहनों के मनमाने इस्तेमाल पर भी अफसर घिरे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि सरकारी गाड़ियों का निजी इस्तेमाल हो रहा है। पार्षद वाहनों की लॉगबुक सदन में मंगवाने पर अड़े रहे लेकिन, बहानेबाजी करके अफसरों ने इसे टाल दिया।
निगम की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे मामले भी उठे। निगम अफसर इनका भी जवाब नहीं दे सके। पार्षदों ने कई रकबे ऐसे गिनाए जहां निगम की जमीन पर पूरी तरह कब्जा हो चुका लेकिन, निगम प्रशासन इसकी पैमाइश तक नहीं कर सका। पार्षदों के आक्रोश को देखते हुए नगर आयुक्त ने इसके खिलाफ जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उपसभापति राजेश त्रिपाठी ने भी अवैध कब्जों को खाली कराने में तेजी लाने की बात कही। लंच के बाद कार्यकारिणी के समक्ष पुनरीक्षित बजट पेश किया गया। सदस्यों ने मूल बजट में किए गए मामूली संशोधनों को मंजूरी दे दी। अंतिम मंजूरी के लिए अब इसे सदन के समक्ष पेश किया जाएगा। बैठक में नगर आयुक्त अवनीश कुमार राय, अपर नगर आयुक्त शादाब असलम, मुख्य अभियंता एलएन सिंह समेत अन्य अधिकारी एवं पार्षद मौजूद रहे।
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विद्युत शवदाहगृह निर्माण के एजेंसी होगी ब्लैक लिस्ट
उन्नाव गेट के पास काफी समय से प्रस्तावित विद्युत शवदाहगृहों के निर्माण में हो रही लेटलतीफी का मामला उठा। पार्षदों ने इस पर रोष जताते हुए कार्रवाई की मांग की। नगर आयुक्त ने बताया कार्यदायी एजेंसी के काम न करने की वजह से उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। अब नए टेंडर कराकर जल्द शवदाहगृह का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
हाउसटैक्स के साथ जुड़ेगा कूड़ा उठान
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान केलिए जल्द ही एक नई कंपनी अधिकृत कर दी जाएगी। नगर आयुक्त के मुताबिक यूजर चार्ज वसूलने में परेशानी खत्म करने के लिए इसे हाउसटैक्स के साथ जोड़कर भेजने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कार्यकारिणी को बताया कि डीटीडीसी के लिए करार अंतिम चरण में है। जल्द ही शासन स्तर से इस पर सहमति मिल जाएगी।
पार्कों एवं ओपन जिम पर वसूला जाएगा यूजर चार्ज
नगर निगम सभी पार्कों में प्रवेश करने एवं ओपन जिम से भी यूजर चार्ज वसूलने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में कार्यकारिणी के सामने प्रस्ताव रखा गया। सदन से इसके लिए अंतिम मंजूरी ली जाएगी। पार्षदों ने भी इस पर सहमति जताई। बता दें, इसके पहले भी सदन ने पार्क में प्रवेश करने के लिए यूजर चार्ज लेने पर मंजूरी दी थी लेकिन, इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
सिकमी किराएदारों को नियमित करेगा निगम प्रशासन
250 सिकमी किराएदार चिह्नित
झांसी। पिछले काफी समय से विवादित चल रहे सिकमी किराएदारों के मामले को निगम प्रशासन अब निपटाने के मूड में है। कार्यकारिणी बैठक के दौरान नगर आयुक्त ने इसके संकेत दिए। नगर आयुक्त ने बताया कि आय बढ़ाने के लिए सिकमी किराएदारों को नियमित करने की जरूरत है। नगर आयुक्त के मुताबिक कुल 250 सिकमी किराएदार चिह्नित हुए। नई दरें तय करके इनको ही दुकानों का आवंटन कर दिया जाए। इसी तरह 150 दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने बिना इजाजत लिए दुकान के स्वरूप में परिवर्तन कर दिया। उन्होंने ऐसे दुकानदारों पर पेनाल्टी लगाए जाने केसाथ ही इनको भी नियमित करने की बात कही। नगर निगम की इलाइट चौराहा, जीवनशाह तिराहे के पास, सुभाषगंज, मानिक चौक, सीपरी बाजार समेत अन्य स्थानों पर दुकानें हैं। रोजगार मुहैया कराने के नाते इन दुकानों को काफी समय पहले बेहद मामूली किराए पर जरूरतमंदों को आवंटित कर दिया गया लेकिन, अधिकांश आवंटियों ने अपनी दुकानें मोटी रकम लेकर दूसरे लोगों (सिकमी) को किराए पर दे दी। कई आवंटियों ने नगर निगम की अनुमति के बगैर लाखों रुपये लेकर दुकानें तक बेच डालीं। इन गड़बड़ियों के सामने आने पर दुकानों के नामांतरण पर 2 अगस्त 2014 को रोक लगा दी गई लेकिन, कई मामले सामने आए जिसमें रोक के बावजूद दुकानों के नामांतरण सिकमी किराएदार के नाम पर कर दिए गए। पार्षद महेश गौतम ने सदन के निर्णय का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को सदन में भेजने को कहा। इस प्रस्ताव पर सदन से अंतिम मंजूरी ली जाएगी।
निर्माण कार्यों में कटौती, पेट्रोल पर बढ़ा खर्च
पुनरीक्षित बजट के दौरान निर्माण कार्यों के बजट में कटौती कर दी गई। सड़क, नाली निर्माण कार्यों के लिए मूल बजट में 42 करोड़ का प्रावधान किया गया था लेकिन, कोविड के चलते इसमें कटौती करते हुए इसे घटाकर 11.03 करोड़ कर दिया गया जबकि गाड़ियों पर खर्च होने वाले पेट्रोल-डीजल के बजट का बढ़ा दिया गया। मूल बजट में पेट्रोल-डीजल के मद में मूल 5.25 करोड़ का प्रावधान था। इसे बढ़ाकर 8 करोड़ कर दिया गया। महामारी के बजट में भी इजाफा हुआ है। मूल बजट में 20 लाख का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर एक करोड़ कर दिय गया। प्रवर्तन दल पर खर्च 30 लाख से बढ़ाकर 55 लाख कर दिया गया। वाहनों के रखरखाव एवं मरम्मत के खर्च को 2 करोड़ से बढ़ाकर 2.5 करोड़ किया गया है। वार्षिक नाला सफाई के लिए कोई पैसा नहीं दिया गया। हाउसटैक्स से 20 करोड़ रुपये की आय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
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पुनरीक्षित बजट के अन्य प्रावधान
- ईईएसएल को मार्ग प्रकाश बिंदुओं के रखरखाव केलिए 150 लाख दिए जाएंगे
- नगर निगम के भवन, स्मारकों एवं चौराहों की अस्थायी प्रकाश व्यवस्था पर व्यय 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख किया गया।
- नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था के खर्च को 3.50 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़ किया गया।
- अकेंद्रीयत सेवा कर्मचारी पेंशन निधि के जरिए 15 करोड़ के प्रावधान को घटाकर 10 करोड़ कर दिया गया।
एक नजर में पुनरीक्षित बजट (लाख में)
मूल बजट पुनरीक्षित
आय 23551.95 21401.95
व्यय 27014.30 31874.30
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