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जनता तो छोड़िए, जनप्रतिनिधियों की भी नहीं सुन रहे नगर निगम के अधिकारी

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झांसी। प्रदेश सरकार अधिकारियों को जनता दरबार लगाने और शिकायतों को सुनने के लिए लगातार निर्देश दे रही है, लेकिन निगम के अधिकारी जनता तो छोड़िए जनप्रतिनिधियों की भी नहीं सुन रहे हैं। आलम यह है कि विधायक , महापौर और पार्षदों द्वारा पारित किए जाने वाले प्रस्तावों को अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। विधायक सदर के कहने और कई बार पत्र देने के बाद भी पार्षदों को सूचनाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इसे लेकर पार्षदों में रोष पनप रहा है।
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नगर निगम में हुई सदन की बैठक में पार्षदों की ओर से प्रस्ताव आया था कि वार्ड में चलने वाले निर्माण कार्य के इस्टीमेट की कॉपी पार्षदों को दी जाएगी। ताकि वे किसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर संबंधित ठेकेदार से सवाल जवाब कर सकेंगे। बैठक में मौजूद सदर विधायक रवि शर्मा ने भी अधिकारियों को प्रस्ताव को गंभीरता से लेकर सूचनाएं देने के लिए कहा था। इसके बाद पार्षद किशोरी प्रसाद रायकवार ने अपने वार्ड में चल रहे पार्क के निर्माण की जानकारी और इस्टीमेट मांगा था। लेकिन उनको आज तक कोई सूचना नहीं दी गई हैै।
मनोनीत पार्षद उमाशंकर राय ने भी निर्माण कार्य का इस्टीमेट मांगा, लेकिन उनको भी आज तक कोई सूचना नहीं मिली। इसके साथ ही बैठक में विधायक ने छोटी समस्याओं पर गौर करने और अमृत योजना के तहत चल रहे पाइपलाइन डालने के काम का नक्शा मुहैया कराने के निर्देश दिए थे। आज तक ये सूचनाएं भी नहीं दी गईं। इसे लेकर पार्षदों में रोष पनप रहा है। साथ ही, अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मनमानी सवालों के घेरे में है।
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ये हटा सकते हैं।
महापौर को बताए बिना खरीद लिए रिक्शे
हाल ही में हुई कार्यकारिणी बैठक में मामला उठा था कि निगम अधिकारियों ने महापौर को जानकारी दिए बिना 45 रिक्शों की खरीद कर ली। बैठक में मामला उठा, तो महापौर ने क्रयादेश शून्य करने के निर्देश दिए। इससे पहले कुटेशन से काम कराने के मामले में महापौर और पार्षदों को तवज्जो देने का मामला उठा था। इससे साफ है जनता से चुनकर आए जनप्रतिनिधि अधिकारियों के लिए कोई मायने नहीं रखते।
ये हटा सकते हैं।
नगर आयुक्त के जाते ही लिपिक गायब
अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों की मनमानी बढ़ती जा रही है। पार्षद उमेश जोशी कहते हैं कि नगर निगम में नगर आयुक्त तो बैठते हैं, लेकिन उनके जाते ही पूरा नगर निगम खाली हो जाता है। एक भी लिपिक और कंप्यूटर ऑपरेटर सीट पर नहीं मिलता। पूछो तो फील्ड में होने की बात कह दी जाती है। लिपिक को फील्ड में क्या काम होता है? कर्मचारी भी निरंकुश होते जा रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारियों के बारे में क्या कहूं? कुछ अधिकारी तो ठेकेदारों के रिश्तेदार बन गए हैं। निगम में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। शहर के विकास के लिए कई बार प्रस्ताव दिए हैं। कई बार पार्षद भी कह चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस बारे में शासन को अवगत कराएंगे। साथ ही पार्षदों की सुनी जाए, इसे लेकर अधिकारियों से भी जवाब तलब करेंगे।- रवि शर्मा, विधायक सदर
पार्षदों को आगणन की प्रति देने का प्रस्ताव सदन में पारित किया गया था। अगर किसी पार्षद ने आगणन की प्रति मांगी है और उसको नहीं मिली, तो पार्षद को हमसे शिकायत करनी चाहिए थी। सदन के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा।
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रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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