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यूपी: वाह नगर निगम, कमिश्नर के आदेश की भी परवाह नहीं!

Thu, 18 Jul 2019 03:30 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
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नारा बना लोगों के लिए परेशानी - फोटो : Amar Ujala
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आवास विकास में बना केके पुरी नाला लोगों के लिए दो साल से मुसीबत बना हुआ है। लगातार नाले की बनावट को लेकर शिकायत के बाद कमिश्नर ने एक माह पूर्व टीएसी जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी परवाह नगर निगम के अधिकारियों को नहीं है। आलम यह है कि जांच अधिकारी ने कई बार नाले के निर्माण से संबंधित दस्तावेज के लिए इंजीनियरों से संपर्क किया पर अब तक पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

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पिछले वर्ष दो सितंबर को हुई भारी बारिश से नाले का पानी लोगों के घरों में घुस गया था। बाढ़ जैसे हालात के बीच घरों में रखा सामान, कार आदि बह गए थे। इस कारण बाशिंदों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। तब से इस नाले के निर्माण में नियमों की अनदेखी को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

आवास विकास में केके पुरी और सैय्यद नगर सहित भुसारी फार्म के पीछे रहने वाले बाशिंदों की शिकायत पर कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेने के बाद उसकी टीएसी जांच की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास के मंडलीय प्राविधिक परीक्षक को सौंपी। जांच के बाद अधिकारियों ने नगर निगम के इंजीनियरों से कई बार दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया तथा पत्र लिखे पर एक का भी जवाब नहीं मिला।
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जांच अधिकारी ने बताया कि 19 जून को पहला और 25 जून को दूसरा पत्र अधिशासी अभियंता को लिखा गया था तथा 29 जून को पूरे प्रकरण की जांच की जानी थी। अभिलेख न होने के कारण मामला अधर में लटक गया। तीसरी बार एक जुलाई को पत्र लिखा तथा दो जुलाई को जांच करने के लिए कहा गया पर उसका भी जवाब नहीं मिला।

बता दें कि आवास विकास में केके पुरी का नाला नगर निगम के इंजीनियरों की गले की फांस बन गया है। दो साल पहले जलभराव के बाद एक समय ऐसा था कि निर्माण विभाग के इंजीनियरों की तरफ से कराए गए कार्य पर ऊंगली उठना शुरू हुई थी। तब, निर्माण विभाग के इंजीनियर लगातार उस नाले की ढाल को सही बता रहे थे पर दबाव पड़ने के बाद इंजीनियरों ने माना कि कहीं-कहीं ढाल गलत है, जिस पर नाले की कहीं-कहीं खुदाई कराकर उसे ठीक कराने का ढोंग किया गया।

दवाब पड़ने पर रोका था ठेकेदार का भुगतान

लगातार नाले की शिकायत की जा रही थी पर इंजीनियरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी। आलम यह हुआ कि महापौर के निरीक्षण के बाद नाले की ढाल की जांच कराई गई तो वास्तव में नाला उल्टा बह रहा था। तब जाकर ठेकेदार पर सख्ती अपनाई गई और आखिरी भुगतान मजबूरी में रोकना पड़ा। वरना, तब तक लगातार ठेकेदार का भुगतान नगर निगम कर रहा कर रहा था।

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नाले के बनने के पहले ही किया था विरोध

क्षेत्र के रहने वालों ने नाले के निर्माण को लेकर पहले ही विरोध किया था और नगर निगम के इंजीनियर से भी शिकायत की थी पर तत्कालीन नगर आयुक्त ने मामले में कोई हस्ताक्षेप नहीं किया। आलम यह हुआ कि नाले का निर्माण जस के तस कर दिया गया, जिसका खामियाजा आज तक वहां के बाशिंदे झेल रहे हैं।

आज भी नहीं मान रहे अपनी गलती

आज भी निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता एलएन सिंह इंजीनियरों की गलती मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि घर और नालियां काफी निचाई पर निर्मित हैं जिस कारण नाले में जलभराव होने पर पानी उनमें भरना शुरू हो जाता है। हालांकि, दिखावे के लिए वहां पर काम शुरू कराया गया था और आश्वासन दिया गया था कि बरसात के पूर्व नाले को ठीक करने का काम पूरा कर लिया जाएगा पर क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नाले में किसी प्रकार से सुधारने का कोई काम नहीं हुआ।
रात में हुई बारिश हुआ जलभराव

रात में हुई बारिश से दोबारा इस क्षेत्र में जलभराव हुआ। लोग सकते में रहे कि यदि ज्यादा बारिश हो गई तो यहां दोबारा बाढ़ वाली स्थिति खड़ी हो जाएगी। हालांकि, बारिश रुकने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली पर देर रात तक इलाके में पानी भरा रहा।

नाले के निर्माण से संबंधित पूर्ण दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। फोन से संपर्क कर जांच करने के लिए साथ चलने के लिए अधिशासी अभियंता से निवेदन किया पर कर्मचारी बीमार होने की जानकारी दी गई। नगर निगम के अधिकारियों का सहयोग न मिलने से रिपोर्ट नहीं बन पा रही है। इस संबंध में कमिश्नर को भी अवगत करा दिया गया है - मोहम्मद शाह आलम, मंडलीय प्राविधिक परीक्षक, टीएसी ग्राम्य विकास

इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। न ही मुझे मंडलायुक्त कार्यालय से कोई पत्र प्राप्त हुआ है। यदि ऐसा कोई पत्र मिलता है तो शत प्रतिशत कार्रवाई कराई जाएगी- रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त
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