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विश्वस्तरीय होगा राजकीय संग्रहालय

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झांसी का राजकीय संग्रहालय जो विश्वस्तरीय बनने जारहा है। अमर उजाला
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झांसी। दो दशक से अधिक पुराने राजकीय संग्रहालय को नया रूप देने की तैयारी है। इसे विश्वस्तरीय बनाने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इसके लिए संस्कृति विभाग और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से रिपोर्ट मांगी गई है। जबकि, काम पर्यटन विभाग कराएगा।
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किले की तलहटी में स्थित राजकीय संग्रहालय की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 16 अक्तूबर 1982 में रखी थी। ये चौदह साल में बनकर तैयार हो पाया था। इसका लोकार्पण प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने 29 फरवरी 1996 को किया था। तेइस साल के सफर में संग्रहालय में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। इसके अलावा नया कोई संग्रह भी संग्रहालय को नहीं मिला है। चंदेलकाल की मूर्तियां, हथियार संग्रहालय की शोभा बढ़ाते हैं। रानी से जुड़ी कोई पुरातत्व धरोहर भी संग्रहालय के पास नहीं है। यहां तक कि रानी की तलवार भी यहां नहीं है। ये ग्वालियर के संग्रहालय में है। पर्यटक सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को निराशा उठानी पड़ती है।
इससे निपटने के लिए संग्रहालय को संवारने की योजना बनाई गई है। इसे विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी है। पर्यटकों को यहां वे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जो विश्व के प्रसिद्ध संग्रहालयों में उन्हें मिलती हैं। इसके अलावा झांसी और बुंदेलखंड से संबंधित ज्यादा से ज्यादा सामग्री संग्रहालय में होगी। रानी से जुड़ी चीजें भी यहां रखी जाएंगी। संग्रहालय के कायाकल्प की योजना बनाने की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग व उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है। दोनों विभागों को विश्व प्रसिद्ध संग्रहालयों की खूबियां जुटाकर उसी के अनुसार कार्ययोजना बनाने को कहा गया है।
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जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने बताया कि झांसी बुंदेलखंड का केंद्रबिंदु है। इसके अलावा रानी की गौरवगाथा चलते ये देश के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। विश्वस्तरीय संग्रहालय बनने से पर्यटन बढ़ेगा। इस काम के लिए धन की कोई कमी नहीं है।
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