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हंगामेदार रही नगर निगम मिनी सदन की बैठक

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झांसी। नगर निगम मिनी सदन की बैठक खासी हंगामेदार रही। सदन ने कार्यकारिणी से पारित नामांतरण शुल्क बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर अगला निर्णय होने तक रोक लगा दी। पार्षदों के खास निशाने पर जनकार्य एवं सफाई विभाग रहे। विपक्षी आधा दर्जन पार्षद सुनवाई न होने पर बिफर उठे और बाहर धरने पर बैठ गए। बैठक को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
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29 सितंबर को कार्यकारिणी ने नगर निगम की दुकानों का नामांतरण शुल्क बढ़ाकर सर्किल रेट का एक प्रतिशत कर दिया था। इसेलेकर व्यापारियों में खासा रोष था। इसके चलते नामांतरण भी नहीं हो रहे थे। इनकी विसंगतियों को देखते हुए सदन ने उपविधि बनने तक इस पर रोक लगा दी। इसके लिए एक कमेटी भी गठित होगी। इसके पहले शनिवार दोपहर महापौर रामतीर्थ सिंघल की अध्यक्षता में बैठक आरंभ हुई। पार्षदों ने सदन की बैठक बुलाने में लेटलतीफी पर नाराजगी जताई। पार्षद कन्हैया कपूर ने स्थगित बैठक को पांच महीने बाद बुलाने पर सवाल उठाए। पार्षद महेश गौतम, उमेश जोशी, जुगल किशोर समेत अन्य ने भी खिंचाई की। पार्षद निरंजन नामदेव ने जनकार्य विभाग पर डामर सड़कों को खोदकर एपेक्स बिछाने का आरोप लगाया। पार्षद प्रवीण नगरिया ने दो-दो हैंडपंप लगाने का काम अधूरा होने की बात कही। बंटी सोनी ने रानी महल के आसपास की दुर्दशा पर नाराजगी जताई। नामित पार्षद उमाशंकर राय ने निगम प्रशासन पर पार्षदों की उपेक्षा का आरोप जड़ा। कहा, कि निगम प्रशासन के रवैये से सरकार की छवि को नुकसान हो रहा है। इसी दौरान अपने प्रस्तावों की अनदेखी पर पार्षद जुगल किशोर की अगुवाई में अब्दुल जाबिर, अनीस अहमद, कमर खातून, आशीष ढीमर, शाहिद मंसूरी, पुष्पेंद्र यादव ने बहिष्कार कर दिया। महापौर रामतीर्थ सिंघल ने इनको समझाने की कोशिश की लेकिन, यह पार्षद नहीं माने। पार्षद सुशीला दुबे, प्रदीप खटीक, मेहरुन निशा, मिथुन यादव समेत दर्जनों पार्षदों ने भी वार्ड की समस्याएं बताईं। सदन के चार साल पूरे होने पर भी पार्षदों ने सवाल-जवाब किए।
बैठक मेें एमएलसी रमा निरंजन, विधायक रवि शर्मा, नगर आयुक्त अवनीश राय, अपर नगर आयुक्त शादाब असलम, सभापति सुनील नैनवानी, पूर्व उपसभापति राजेश त्रिपाठी, राजू साहू, विकास खत्री, सुलेमान मंसूरी, गायत्री गुप्ता समेत अन्य पार्षद मौजूद रहे।
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इस पर फंसा है पेच
मौजूदा नामांतरण शुल्क के मुताबिक अभी 1 रुपये से एक लाख रुपये की संपत्ति पर 500 रुपये, दो लाख रुपये पर 1000 रुपये, चार लाख रुपये तक पर 2 हजार रुपये, छह लाख रुपये तक की संपत्ति पर तीन हजार रुपये, आठ लाख तक की संपत्ति पर चार हजार रुपये एवं आठ लाख से ऊपर की संपत्ति के नामांतरण के लिए पांच हजार रुपये लिए जाते हैं। कार्यकारिणी ने इसकी जगह डीएम सर्किल रेट का एक प्रतिशत दर तय कर दिया। इस वजह से यह नामांतरण शुल्क कई गुना अधिक बढ़ गया। इसी तरह बैनामा दानपत्र आदि के नामांतरण के विलंब शुल्क करीब चार गुना बढ़ा दिया। इसको लेकर व्यापारी नाराज हैं।
सदन में गूंजा किताबों के दीमकों से चट कर जाने का मामला
अमर उजाला ने उठाया था लाइब्रेरी की दुर्दशा का मामला
मिनी सदन में गांधी स्मारक भवन स्थित नगर निगम की प्रतिष्ठित लाइब्रेरी से दीमक के पांच हजार से अधिक किताबें के चट कर जाने का मामला भी उछला। कांग्रेसी पार्षद सुलेमान मंसूरी ने इसे उठाते हुए लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कहा, इस लाइब्रेरी की दुर्दशा चिंतनीय है। अन्य पार्षदों ने भी नाराजगी जताई। बता दें, अमर उजाला के शनिवार के अंक में इस लाइब्रेरी की दुर्दशा पर विस्तार से समाचार प्रकाशित किया गया था।
विधायक को पढ़ाना पड़ा अनुशासन का पाठ
सदन की बैठक में आरोप-प्रत्यारोप के दौरान जमकर हंगामा हुआ। इस वजह से किसी की बात भी सुनाई नहीं पड़ रही थी। कुछ पार्षद असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने लगे। अव्यवस्था देख सदर विधायक रवि शर्मा बिफर उठे। पार्षदों को शांत कराते हुए संसदीय पंरपरा के मुताबिक व्यवहार करने की नसीहत दी। विधायक ने कहा जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जवाबदेही होनी चाहिए। उनकी नसीहत के बाद कुछ देर तक सदन में शांति रही लेकिन, नामकरण प्रस्ताव पारित होने के बाद विधायक के जाते ही सदन में पार्षदों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया।
मनोनीत पार्षदों का झलका दर्द
कहा, तीन साल में एक रुपये का काम भी नहीं करा सके
मिनी सदन की बैठक में भाजपा के मनोनीत पार्षदों का दर्द छलक उठा। मनोनीत पार्षद वीर सिंह ने निगम प्रशासन के साथ ही निर्वाचित पार्षदों पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। कहा, कार्यकाल के करीब तीन साल साल गुजर गए लेकिन, आज तक मनोनीत पार्षद एक रुपये का काम नहीं करा सके। निगम प्रशासन उनके साथ कोई संवाद नहीं करना चाहता। लोकार्पण समेत अन्य कार्यक्रमों की सूचना मनोनीत पार्षदों को नहीं दी जाती है। अन्य मनोनीत पार्षदों ने भी उनकी हां में हां मिलाई।
पाल कॉलोनी का नाम बदलकर हुआ गौतम बुद्घ नगर
जीवन शाह तिराहा के नाम बदलकर हुआ अहिल्याबाई चौक
नगर निगम सदन के सम्मुख नामकरण संबंधी कुल 19 प्रस्ताव पेश हुए। इनमें सदन ने 15 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिए जबकि चार प्रस्ताव नामांजूर कर दिए गए। पार्षद ममता कुशवाहा के प्रस्ताव पर पाल कॉलोनी का नाम बदलकर गौतमबुद्घ नगर कर दिया गया। पार्षद लखन कुशवाहा के प्रस्ताव पर जीवनशाह तिराहे का नाम बदलकर अहिल्याबाई चौक, पार्षद सुलेमान मंसूरी के प्रस्ताव पर मोहल्ला चमरयाना का नाम बदलकर संतदास,
ढिमरयाना का नाम वीर एकलव्य नगर, पार्षद किशोरी प्रसाद के प्रस्ताव पर कछियाना मोहल्ला का नाम बदलकर गोविंद दास कोठारी नगर को मंजूरी दे दी गई। मेडिकल बाईपास के स्थित पार्क का नाम भगवान परशुराम चौक पर रखने के प्रस्ताव पर मनोनीत पार्षद मनु सिंह ने कहाकि यह जगह महाराणा प्रताप के नाम पर की जा चुकी। इसकी जगह इलाहाबाद बैंक चौराहे पर सरदार पटेल चौक से रेलवे स्टेशन जाने वाले तिराके का नामकरण परशुराम चौक किया गया। पार्षद विकास खत्री के प्रस्ताव पर मनु विहार का नाम बदलकर मदनमोहन मिश्र के नाम पर किया गया।
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अब नए नाम से पहचाने जाएंगे यह रास्ते
- चित्रा चौराहो से मिशन कंपाउंड मार्ग का नाम जसवंत सिंह सोलंकी मार्ग
- इलाइट चौराहा से गोविंद चौराहा के बीच की सड़क श्रीगुरु नानक देव जी मार्ग
- गोविंद चौराहे से नारायण धर्मशाला जाने वाली सड़क माधव स्मृति मार्ग
- शिवानी होटल तिराहे का नाम बदलकर महात्मा श्री ज्योतिराव फुले तिराहा
- इतवारी गंज चौक का नाम बुंदेलखंड केसरी पहलवान रामचरण पहलवान के नाम पर
- समाजसेवी मुफ्ती फजल मंसूरी के निवास की ओर जाने सड़क का नाम मुफ्ती फजल मंसूरी के नाम पर
- इलाहाबाद बैंक चौराहा से झांसी चौराहा तक के मार्ग का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामनाथ खैरा मार्ग
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