झांसी। नगर निगम में पिछले साल उपसभापति चुनाव के लिए छह माह का इंतजार करना पड़ा और अब छह सदस्यों का कार्यकाल पूरा हुए सवा महीना बीत चुका है, इसके बावजूद चुनाव की तिथि तय नहीं हो सकी है। इससे सत्ता से लेकर विपक्षी दलों के पार्षद बेचैन हैं। जनप्रतिनिधियों से भी चुनाव में देरी की शिकायत कर रहे हैं।
नगर निगम की कार्यकारिणी में 12 सदस्य हैं। बीते 20 जून को दो साल पूरा होने पर कार्यकारिणी से भाजपा पार्षद आशीष तिवारी, दिनेश प्रताप सिंह, मुकेश सोनी, मोनिका गुप्ता, प्रवीण लखेरा और बसपा के महेश गौतम का कार्यकाल खत्म हो चुका है। नगर निगम में भाजपा के पास दो तिहाई बहुमत यानी कि 45 पार्षद हैं। चूंकि, इस चुनाव में नामित सदस्य भी वोट करते हैं। सभी सात नामित सदस्य भाजपा के ही हैं। इस स्थिति में 52 वोट होने पर भाजपा आसानी से फिर अपने पांचों सदस्यों को कार्यकारिणी में पहुंचा सकती है, बशर्ते मतदान होने पर क्रॉस वोट न पड़ें। चूंकि, अब तक कार्यकारिणी के तीन चुनाव हो चुके हैं। इनमें भाजपा की ओर से 21 पार्षद अलग-अलग समय में कार्यकारिणी सदस्य चुने जा चुके। अब बीजेपी के 24 पार्षद बचे हैं, जिन्हें एक बार भी कार्यकारिणी सदस्य बनने का मौका नहीं मिला। इनमें अधिकांश पार्षद इसी बार कार्यकारिणी में जगह पाना चाहते हैं। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के भी खूब चक्कर काट रहे हैं। इन पार्षदों को उम्मीद थी कि जल्दी चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी चुनी जाएगी लेकिन अब तक मामला ठंडे बस्ते में है। वहीं, मेयर बिहारी लाल आर्य का कहना है कि जल्द ही कार्यकारिणी का चुनाव कराया जाएगा।
मेयर को ज्ञापन देने की तैयारी में पार्षद
कार्यकारिणी चुनाव कराने को लेकर कई पार्षद मेयर को ज्ञापन देने की भी तैयारी कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से नगर निगम में पार्षदों के बीच चुनाव में लेटलतीफी पर चर्चा भी हो रही है। इससे कई पार्षदों में आक्रोश भी है।
ये है कार्यकारिणी का महत्व
नगर निगम की कार्यकारिणी की बजट, विकास योजनाओं, वित्तीय प्रस्तावों समेत अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा कार्यकारिणी नगर निगम के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी करती है। कई मामलों में सदन की बैठक से पहले प्रस्तावों को कार्यकारिणी की मंजूरी मिलना भी जरूरी होती है।